शिवपुराण से (रूद्र संहिता तृतीय पार्वती खण्ड) (531) गतांक से आगे......
श्री शिव की आराधना के लिए पार्वती जी की दुष्कर तपस्या ब्रह्माजी कहते हैं-देवर्षे! तुम्हारे चले ज…
श्री शिव की आराधना के लिए पार्वती जी की दुष्कर तपस्या ब्रह्माजी कहते हैं-देवर्षे! तुम्हारे चले ज…
ब्रह्माजी का शिव की क्रोधग्नि को वडवानल की संज्ञा दे समुद्र में स्थापित करके संसार के भय को दूर …
डॉ0 नीलम महेंद्र, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। संसार मे ज्ञान की कमी, कभी नहीं रही, बस दृष्टि, और …