आशा शैली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र
बहार का स्वागत सब करते हैं
पतझड़ का स्वागत कौन करेगा
सिवाए मेरे
सेब के ठूंठ वृक्षो पर
एक भी पत्ता नहीं होता
पौस-माघ की भयानक शीत में
ठिठुरता है पूरा वजूद
आंखों को पीना पड़ता है ढेर सारा धुंआ
जो उगलती है
बदन को गर्माने वाली लकड़ियों
चारों तरफ रहता है गांव में
सन्नाटा
चलती हैं बर्फीली हवाएं
फटने-सूखते होठ
लेकिन मैं स्वागत करती हूं
इस बर्फीले मौसम का
क्योंकि
सेबों में अंकुरने लगते हैं गेहूं और जौं
आकाश से चुपचाप
बरसती है रूई के फाहों की बर्फ
श्वेत-धवल
चमकने लगते हैं पर्वत शिखर
सेब के वृक्षों की सूखी टहनियों पर
उतर आते हैं
लम्बी पूंछ वाले नीलकण्ठ
बाग की मुण्डेरों पर
महकने लगती है गुच्छों में
पीली आंखों वाली नर्गिस
और मैं
स्वागत करती हूं पतझड़ का
थोड़ी सी बर्फ हाथ में लिए
सितारगंज (उधम सिंह नगर) उत्तरांचल
बहार का स्वागत सब करते हैं
पतझड़ का स्वागत कौन करेगा
सिवाए मेरे
सेब के ठूंठ वृक्षो पर
एक भी पत्ता नहीं होता
पौस-माघ की भयानक शीत में
ठिठुरता है पूरा वजूद
आंखों को पीना पड़ता है ढेर सारा धुंआ
जो उगलती है
बदन को गर्माने वाली लकड़ियों
चारों तरफ रहता है गांव में
सन्नाटा
चलती हैं बर्फीली हवाएं
फटने-सूखते होठ
लेकिन मैं स्वागत करती हूं
इस बर्फीले मौसम का
क्योंकि
सेबों में अंकुरने लगते हैं गेहूं और जौं
आकाश से चुपचाप
बरसती है रूई के फाहों की बर्फ
श्वेत-धवल
चमकने लगते हैं पर्वत शिखर
सेब के वृक्षों की सूखी टहनियों पर
उतर आते हैं
लम्बी पूंछ वाले नीलकण्ठ
बाग की मुण्डेरों पर
महकने लगती है गुच्छों में
पीली आंखों वाली नर्गिस
और मैं
स्वागत करती हूं पतझड़ का
थोड़ी सी बर्फ हाथ में लिए
सितारगंज (उधम सिंह नगर) उत्तरांचल