आदमी

विजेश कुमार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र
दर्द सहता आदमी
और दर्द देता आदमी
क्या फर्क दोनो में है
आखिर हैं दोनो आदमी
दर्द देने वाली भी जलता है
और सहने वाला भी जलता है
क्या फर्क जलने में है
जलते हैं दोनो आदमी
दर्द ही देने वाले को है
और दर्द सहने वाले को है
क्या फर्क उस दर्द में है
सहते हैं दोनो आदमी
मत रो, उसी से मिल गले
कुछ पल तो दोनो संग रहे
क्या फर्क रोने में है
रोते हैं दोनो आदमी
एक दिन समझना पड़ेगा
हर जीवन की है रीत ये
छोड़ नफरत समझले दिल
आखिर हो दोनो आदमी

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