केसी जैन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठना जरूरी है। यदि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि आगरा में पीएम 10 प्रदूषण का लगभग 80 प्रतिशत सड़क एवं मिट्टी की धूल से तथा एनओयू प्रदूषण का 84.5 प्रतिशत वाहनों से उत्पन्न होता है, जबकि उद्योगों का योगदान कई मामलों में मात्र 4.53 प्रतिशत से 11 प्रतिशत के बीच है, तो क्या प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का केंद्र उन स्रोतों पर होना चाहिए जिनका योगदान सबसे अधिक है? ताजमहल, आगरा किला तथा फतेहपुर सीकरी जैसी विश्व धरोहरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, परंतु किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है या नहीं। विश्व पर्यावरण दिवस आत्ममंथन का अवसर है कि हम उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों का पुनर्मूल्यांकन करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति वास्तविक कारणों पर केंद्रित हो।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार की गई स्रोत-विभाजन रिपोर्टों ने आगरा में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान की है। जून 2021 की रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 प्रदूषण में सड़क की धूल का योगदान 63 प्रतिशत है, इसमें उद्योगों का योगदान केवल 11 प्रतिशत है। वाहनों का योगदान भी 11 प्रतिशत है। पीएम 10 प्रदूषण में स्थिति और भी स्पष्ट है। सड़क एवं मिट्टी की धूल का योगदान 79.80 प्रतिशत है। उद्योगों का योगदान केवल 4.53 प्रतिशत है और वाहनों का योगदान 4.94 प्रतिशत है। एनओयू प्रदूषण में वाहनों का योगदान 84.5 प्रतिशत है और उद्योगों का योगदान केवल 4.7 प्रतिशत है। केसी जैन ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आगरा की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारक सड़क की धूल और यातायात हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। प्रतिदिन हजारों भारी वाहन केवल एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए आगरा क्षेत्र से गुजरते हैं। इनमें से अधिकांश का आगरा शहर से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता, फिर भी उनका प्रभाव स्थानीय प्रदूषण, जाम और सड़क धूल के रूप में सामने आता है। आगरा उत्तरी बाईपास के निर्माण का एक प्रमुख उद्देश्य इसी बाहरी यातायात को शहर से दूर रखना था। यदि भारी वाहनों को प्रभावी रूप से बाईपास की ओर स्थानांतरित किया जाए तो वायु प्रदूषण, यातायात दबाव तथा सड़क धूल में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
यदि पीएम 10 प्रदूषण का लगभग 80 प्रतिशत स्रोत सड़क एवं मिट्टी की धूल है तो सड़क धूल नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और यांत्रिक सड़क सफाई, वैक्यूम स्वीपिंग मशीनों की तैनाती, सड़क किनारों का पक्कीकरण, हरित पट्टियों का विकास, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण तथा जाम वाले क्षेत्रों के यातायात पुनर्गठन जैसे उपायों पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।
सरकार को आईआईटी कानपुर की रिपोर्टों का गहन अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया जाना चाहिए। ताजमहल की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते नीतियाँ वास्तविक तथ्यों पर आधारित हों।
विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि क्या हम प्रदूषण के उन कारणों पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं, जिनका योगदान सबसे अधिक है। यदि सड़क की धूल और यातायात प्रमुख स्रोत हैं, तो संसाधनों और प्रयासों का बड़ा हिस्सा भी उन्हीं पर केंद्रित होना चाहिए। ताजमहल की सुरक्षा हमारा राष्ट्रीय दायित्व है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सकता है।
अधिवक्ता एवं पर्यावरण मित्र आगरा, उत्तर प्रदेश
