विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्कार निधि के तत्वाधान में पर्यावरणविदों को सम्मानित किया

गौरव सिंघल, सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन ने आज कहा कि विकास को लेकर पश्चिम का आंख मींचकर अनुसरण करने और भारतीय परंपराओं और संस्कारों को तिलांजलि देने से पर्यावरण के समक्ष गहरा संकट पैदा हुआ है, जिसका समाधान अपने प्राचीन संस्कारों को अपनाने, सोच में परिवर्तन लाने और स्मार्ट सिटी के बजाए स्मार्ट विलेज की योजनाओं पर काम करने से होगा। सुरेश जैन आईआईटी रूड़की के सभागार में संस्कार निधि के तत्वावधान में आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण एवं जनसहभागिता विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। समारोह की अध्यक्षता मां शाकुम्बरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने की। इस अवसर पर भारत विकास परिषद ने ड्रोन के जरिए नीम और दूसरे बहुउपयोगी पौधों के बीज डालकर वहां बड़े स्तर पर पौधा रोपण कराया। संस्कार निधि की ओर से आज अनेक पर्यावरणविदों को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ प्रचारक सुरेश जैन ने कहा कि पर्यावरण एक संस्कार है। उन्होंने कहा कि नहाने और पीने वाली नदियों का जल हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है। कार्यक्रम से पूर्व सुरेश जैन कुलपति प्रोफेसर विमला वाई, संयोजक पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने पौधा रोपण भी किया। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वत पर कभी 180 झीलें हुआ करती थीं, जहां लाखों पक्षी मंडराया करते थे, अब वो सब खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि चांदी के सिक्कों की बदौलत वहां होटल बन गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में जब हम स्कूलों में पढ़ते थे तो यमुना नदी में स्नान करते थे और उसका पानी भी पीते थे। आज इसका पानी हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में बहुत विशाल झील हुआ करती थी, लेकिन आज उस झील को भरने वाली नदियां सूख गई है और नदी का रास्ता रोक दिया गया है जिससे अब वहां बाढ़ आती है। उन्होंने कहा कि अब उस झील को भी पाटकर वहां कालोनियां खड़ी कर दी गईं। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़े-बड़े हाइवे बनाए जा रहे हैं, जिससे हरियाली कम हो रही है और व्यापक स्तर पर वृक्षों का कटान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण कोई अलग गतिविधि नहीं हैं, बल्कि यह संस्कार है।

समारोह अध्यक्ष मां शाकुम्बरी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने कहा कि उर्वरकों का बेहिसाब इस्तेमाल रूकना चाहिए। प्रदूषण तभी फैलेगा जब हम संतुलन से ज्यादा पोषण करेंगे। उन्होंने की कि वे पर्यावरण संबंधी विषयों को लेकर बदलावों की शुरूआत खुद से करें। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी के दौरान स्थितियां ज्यादा बिगड़ी हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण और चेतना के लिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सामने आए बगैर बेहतर पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूगर्भ जल और मिट्टी दोनों दूषित हो रहे हैं। 

कार्यक्रम संयोजक एवं पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने कहा कि कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर दंड की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि अनेक वर्षों से उनकी संस्था संस्कार निधि पर्यावरण को लेकर लगातार अभियान चला रही है। इस अवसर पर नगर विधायक राजीव गुंबर, मेयर डा. अजय सिंह, पूर्व सांसद प्रदीप चैधरी, भारत विकास परिषद के राजीव गोयल, पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर योगेश गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल, डाॅ. एसके उपाध्याय, प्रधानाचार्य सुधीर जोशी, रवि सिंघल, अमित गगनेजा, राकेश जैन, सुनील गुप्ता, गुंजन गर्ग, मानसिंह जैन, पुण्य गर्ग एडवोकेट आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।

Post a Comment

Previous Post Next Post