गौरव सिंघल, सहारनपुर। नए एक्सप्रेसवे बनने से उन पर दौड़ने वाले वाहनों की गति 80 से 120 हो जाने से एकाएक हादसों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है और कोई दिन ऐसा जाता है जब कोई हादसा ना होता हो। कई हादसे तो ऐसे हुए हैं जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्यों को जान गंवानी पड़ी है। शुक्रवार शाम दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर थाना रामपुर मनिहारान के पास हरियाणा से हरिद्वार जा रही कार को पीछे से आ रही कार ने जोरदार टक्कर मारी कि कार दस फीट तक ऊपर उछल गई और कार के परखच्चे उड़ गए। जिसमें के सोनीपत जिले के मंडारा गांव निवासी एक परिवार के प्रवीण कुमार 40 वर्ष, उनकी पत्नी प्रीति 37 वर्ष, मां सुदेश 71 वर्ष और भतीजे शिवांस 9 वर्ष की दर्दनाक मौत हो गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए। यातायात विभाग के मुताबिक पिछले चार महीने के दौरान सहारनपुर में हुए सड़क हादसों में करीब 100 लोगों की मौत हो गई और करीब ढाई सौ लोग घायल हो गए। सबसे ज्यादा हादसे 23 सड़क हादसे बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र में हुए। जिसमें 13 लोगों की मौत और 38 घायल हुए। दूसरे स्थान पर नागल थाना क्षेत्र में हुए बीस सड़क हादसों में 14 लोगों की मौत हुई और 20 घायल हुए। थाना सरसावा क्षेत्र में 37 सड़क हादसे हुए जिसमें 18 लोगों की मौत हुई और 19 घायल हुए। कोतवाली देहात थाना मिर्जापुर, थाना फतेहपुर क्षेत्रों में 16-16 सड़क हादसे हुए। कोतवाली देहात क्षेत्र में 8 लोगों की मौत और 9 घायल हुए और थाना फतेहपुर क्षेत्र में 11 लोगों की मौत और 24 घायल हुए। मिर्जापुर में 14 की मौत और 34 घायल हुए। थाना रामपुर मनिहारान थाना गागलहेड़ी क्षेत्र में 14-14 सड़क हादसे हुए। रामपुर मनिहारान में 18 की मौत और 21 घायल हुए। गागलहेड़ी में 12 की मौत और 22 घायल हुए। नानौता और देवबंद थाना क्षेत्रों में 13-13 सड़क हादसे हुए। देवबंद में 12 लोगों की मौत और 25 लोग घायल हुए। नानौता में 16 लोगों की मौत और 32 लोग घायल हुए। इसी तरह थाना बड़गांव क्षेत्र में भी 13 सड़क हादसे हुए जिनमें 8 की मौत और 28 घायल हुए। थाना चिलकाना और थाना नकुड़ क्षेत्र में 11-11 सड़क हदासे हुए। चिलकाना में 10 लोगों की मौत और 23 घायल हुए जबकि थाना नकुड़ में 5 लोगों की मौत और 7 लोग घायल हुए। गंगोह थाना क्षेत्र में 9 सड़क हादसों में 3 लोगों की मौत और 8 लोग घायल हुए। थाना कुतबुशेर क्षेत्र में आठ सड़क हादसों में छह लोगों की मौत और तेरह लोग घायल हुए।
यातायात विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सड़क हादसों के पीछे वाहनों की तेज रफ्तार, ओवर टेकिंग, चालक की लापरवाही और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान थकान खास वजह है। बेकाबू रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कल हुआ हादसा जिसमें लोगों के दिलों को झकझोर दिया और एक ही परिवार के चार लोगों की जान लील गया। पहला हादसा नहीं था। इसी माह 19 जून को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सफाई कार्य में लगे मजदूरों के वाहन में पीछे से तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी थी। जिसमें एक व्यक्ति रितिक की मौत हो गई थी और महिला सुनिता एवं मामचंद घायल हो गए थे।
27 फरवरी को देहरादून-अंबाला हाइवे पर बेकाबू ट्रैक्टर-ट्राली पलट गई थी जिसमें एक व्यक्ति बाबी देओल की मौत हो गई थी और आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। 28 नवंबर 2025 को गागलहेड़ी थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में कार पर बजरी का डंपर पलट जाने से कार सवार संदीप, उसकी मां रानी, बहन जूली, जीजा शेखर, भांजे अनिरूद्ध और मौसी के बेटे विपिन की मौके पर ही मौत हो गई थी। 26 नवंबर 2025 को थाना फतेहपुर क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बाइक की डिवाइडर से टकराने पर अक्षय की मौत हो गई थी।
