दलितों पर भी दिखा योगी का आकर्षण, अखिलेश के पीडीए पर सवाल ?

सुरेंद्र सिंघल/गौरव सिंघल, सहारनपुर। संवेदनशीलता और ध्रुर्वीकरण के नजरिए से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हरियाणा और उत्तराखंड की सीमाओं को छूता सहारनपुर जनपद 40 फीसद मुस्लिम आबादी के साथ-साथ दलित महिला नेत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का भी कभी गढ़ रहा है। लेकिन राष्ट्रीय पटल पर नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उदय के साथ ही सहारनपुर ही नहीं पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जातीय और राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। इसका असर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देवबंद की सभा में साफ दिखाई दिया। कभी शहरों और बनियों, ब्राह्मणों की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा की सभाओं में अब सभी जातीय की भागीदारी मुखरता से दिखने लगी है।

भाजपा के उदय के साथ मायावती के सहारनपुर के दलित समाज के दो सिपहसालार हरोड़ा के पूर्व विधायक जगपाल सिंह और नागल, रामपुर मनिहारान के पूर्व विधायक रविंद्र कुमार उर्फ मोल्लू भाजपा में हैं और दोनों गुरूवार को योगी जी के मंच पर उपस्थित थे। ये दोनों पूर्व विधायक दलित समुदाय के चमार वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। दलितों में इसी बिरादरी की बहुलता है। सहारनपुर की सात में से कम से कम पांच विधानसभा क्षेत्रों बेहट, सहारनपुर देहात, देवबंद, रामपुर मनिहारान एवं नकुड़ में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक है।
जिले में कागजों पर देवबंद विधानसभा अकेली राजपूत बहुल सीट है। हालाकि परिसीमन के बाद गूर्जर एवं त्यागी ब्राह्मण भी करीब करीब राजपूतों के बराबर ही हैं। लेकिन देवबंद में मुस्लिम 39 फीसद और दलित 22-23 फीसद है।
योगी जी की देवबंद की सभा में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय थी और ग्रामीण महिलाओं में ज्यादा प्रतिनिधित्व दलित महिलाओं का था। वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल  ने कई महिलाओं से बातचीत की। जिन्होंने कहा कि भले ही कभी बसपा दलितों की पार्टी रही हो लेकिन भाजपा मोदी और योगी दलित उत्थान के लिए बढ़चढ़कर काम कर रहे हैं। इसलिए दलितों में भी बदलाव हो रहा है और आने वाले चुनावों में उनका वोट योगी को मिलेगा।
योगी के हिंदुत्ववादी चेहरे और तीखे बोलों को लेकर बड़ा मुस्लिम समुदाय करीब-करीब मौन है। जो पहले कभी बेहद मुखर रहता था। सहारनपुर में अभी भी सात में से दो विधायक उमर अली खान बेहट और आशु मलिक सहारनपुर ग्रामीण मुस्लिम समुदाय से हैं और दोनों ही सपा के हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सहारनपुर नगर क्षेत्र में बड़ी बढ़त हासिल की थी। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि इमरान मसूद घोषित रूप से ना केवल सपा के दोनों मुस्लिम विधायकों बल्कि अखिलेश यादव के खुल्लम-खुल्ला खिलाफ हैं।
जानकार के मुताबिक अखिलेश यादव के लिए रामपुर मनिहारान आरक्षित और सहारनपुर नगर सीट छोड़ेंगे। जिले की नकुड़ और गंगोह दोनों सीटों पर पिछले चुनावों में भाजपा के दो गूर्जर विधायक मुकेश चौधरी और कीरत सिंह विजयी हुए थे लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में कैराना की सपा सांसद और पार्टी का दमदार मुस्लिम महिला चेहरा इकरा हसन भारी बढ़त हासिल की थी। दोनों विधायकों का पार्टी के अंदर और बाहर जबरदस्त विरोध है। मुकेश चौधरी के प्रतिद्वंद्वी पूर्व मंत्री डा. धर्मसिंह सैनी भाजपा में टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं जबकि गंगोह सीट पर पूर्व विधायक महिपाल माजरा और पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी हैं प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वैश्य बिरादरी के प्रमुख नेता और सहारनपुर से तीन बार विधायक रहे संजय गर्ग के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा में आने के बाद से वैश्य बिरादरी और व्यापारी समाज में विपक्षी दलों की किसी भी सेंधमारी की गुंजाइश खत्म हो गई है। सहारनपुर जनपद में सातों सीटों पर करीब एक लाख वैश्य एवं व्यापारी मतदाता हैं। संजय गर्ग वैश्य बिरादरी के प्रदेश स्तरीय नेता हैं और अपनी बिरादरी का प्रमुख चेहरा भी हैं। इन सभी हालात के मद्देनजर भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों में सहारनपुर जनपद में सातों सीटों पर निर्णायक स्थिति में रहेगी। भले ही लोकसभा चुनावों में वह देवबंद को छोड़कर सभी सीटों पर विपक्षी गठबंधन से पिछड़ गई थी। एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनता में प्रमुख और आकर्षक चेहरा बन गए हैं। देवबंद की सभा में इन तथ्यों पर अपनी मोहर लगा दी है।

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