गौरव सिंघल, देवबंद। कोतवाली के दलित बहुल लालवाला गांव में बीती नौ मई की प्रातः 11 बजे के करीब दो बीघा भूमि के मालिकाना अधिकार को लेकर दो गुटों के बीच हुई हिंसा के मामले का पटाक्षेप करते हुए डीएम सहारनपुर अरविंद कुमार चौहान और एसएसपी अभिनंदन सिंह ने संयुक्त प्रेसवार्ता में पत्रकारों को बताया कि लालवाला की घटना सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। एक पक्ष जिसने कुछ वर्ष पूर्व दो बीघा जमीन दूसरे पक्ष से खरीदी थी और उस पर उसी का कब्जा चला आ रहा था। कुछ लोगों ने दलित पक्ष के व्यक्ति को बहला-फुसलाकर विश्वास में लिया कि उस जमीन पर कब्जा किया जाए। उस जमीन की बाजार में आज कीमत बढ़ गई है और मामले को विवादित किया जाए और जातीय वैमनस्य का नाम दे दिया जाए।
एसएसपी अभिनंदन सिंह ने कहा कि उन्होंने और डीएम अरविंद कुमार चौहान ने पूरे मामले की मौके पर जाकर गहराई से जांच पड़ताल की। उसके बाद पुलिस ने हिंसा फैलाने के मामले में हमलावर पक्ष के शेर सिंह उर्फ शेरू पुत्र कबूला उर्फ कबूल सिंह निवासी गांव लालवाला और अक्षय पुत्र ऋषिपाल निवासी गांव लालवाला को गिरफ्तार किया है। कुछ अन्य लोगों की भी शीघ्र ही गिरफ्तारी की जाएगी।
जिलाधिकारी के मुताबिक इस भूमि पर रविंद्र सिंह राणा पुत्र स्वर्गीय रमेश राणा का कब्जा वैध पाया गया। वह जमीन उन्होंने 15 वर्ष पूर्व रामसिंह से खरीद थी। जिस पर उनका घेर बना हुआ है। एसएसपी के मुताबिक दूसरे पक्ष के रामचंद्र आदि के मन में लालच आ गया और नरेश जिसके पिता राम सिंह का नाम चकबंदी इत्यादि से पृथक गाटा होने के कारण वसीयतनामें के आधार पर राम सिंह आदि का नाम अंकित चला आ रहा है। राजपूत वर्ग पक्ष के रविंद्र सिंह राणा और दलित पक्ष के नरेश पुत्र राम सिंह में विवाद था। एसएसपी के मुताबिक नरेश को रामचंद्र आदि ने उकसाकर जमीन विवाद को जातिगत रंग देकर कब्जा करने का प्रयास नौ मई को किया। रामचंद्र के साथ गांव के शेर सिंह, जो थाना देवबंद का हिस्ट्रीशीटर है और उसने दो साल पहले दीपावली के दिन रविंद्र के लड़के के सीने पर तमंचा रखकर गोली चलाई थी पर फायर मिस होने के कारण वह बच गया था। रामचंद्र ने गांव लालवाला के सुमित पुत्र कंवर सिंह, आशीश पुत्र सत्येंद्र के साथ मिलकर पिछले कुछ दिनों से सुनियोजित षड्यंत्र रचकर और नरेश को लालच देकर रविंद्र राणा पर इस विवाद को जातीय रूप देकर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया। इन लोगों ने रविदास जयंती पर रविंद्र राणा के घर के सामने संत रविदास और डा. भीमराव अंबेडकर के संयुक्त बोर्ड लगा दिए और नौ मई को महाराणा प्रताप जयंती पर अवसर का फायदा उठाकर पांच मई को रामचंद्र ने अपने समाज के लोगों को लाउडस्पीकर से मंदिर के पास इकट्ठा करके भड़काया। पुलिस द्वारा समझाने बुझाने पर लोग घरों को चले गए। आठ मई को फिर से गांव में अफवाह फैलाई गई कि इस जमीन पर महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित की जा रही है। लोग भी मौके पर इकट्ठा हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो मूर्ति लगाने की सूचना झूठी पाई गई। नौ मई को रामचंद्र ने अपने साथी शेर सिंह आदि 40-50 महिला पुरूषों को साथ लेकर ट्रैक्टर आदि में ईंट-पत्थर भरकर रविंद्र राणा के घर पर हमला-पथराव कर दिया। हमले में महिलाओं को आगे किया हुआ था जिससे पुलिस को पथराव और हिंसा करने वालों पर काबू पाने में पुलिस को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठी चार्ज करना पड़ा जिसमें कई लोग घायल हो गए। रविंद्र राणा ने इस मामले में देवबंद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। जिसकी देवबंद पुलिस विवेचना कर रही है।
एसएसपी अभिनंदन सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो आडियो की जांच कर और गवाहों के बयानों के आधार पर देवबंद पुलिस ने शेर सिंह और अक्षय को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। बाकी लोगों की भी शीघ्र ही गिरफ्तारी की जाएगी।
