गौरव सिंघल, सहारनपुर। मां शाकुम्बरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डा. विमला वाई ने आज कहा कि उनकी यूनिवर्सिटी चाहती है कि सहारनपुर का औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र आर्टिकल्चर महाविद्यालय के रूप में संबद्ध हो जाए। इस संबंध में वह शासन को अपनी ओर से प्रस्ताव भेज रही हैं। उन्होंने बताया कि सहारनपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने इस संबंध में उन्हें आज प्रस्ताव दिया। वह उनके प्रस्ताव से सहमत हैं और इसके लिए वह अपने स्तर से गंभीर प्रयास करेंगी। संजय गर्ग ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना 1950 में हुई थी और 1974 में प्रदेश के उद्यान विभाग के गठन के बाद उसे हस्तांतरित कर दिया गया। 1976 में इसे प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। इसका कुछ क्षेत्रफल 154.6 एकड़ है। परिसर में विभिन्न प्रजातियों के वनस्पति और औद्यानिक फसलों के करीब 75 एकड़ क्षेत्रफल में 2750 वनस्पतिक/मातृ वृक्षों का जर्म प्लाजमा मौजूद है। 12 एकड़ क्षेत्रफल में कार्यालय, आवासीय, प्रशिक्षण, छात्रावास, अतिथिगृह आदि भवनों का रखरखाव, 11 किलोमीटर सड़क, संपर्क मार्गों और करीब 11 हजार रनिंग मीटर में सिंचाई, नालियों का रखरखाव, पांच हजार रनिंग मीटर में बाहरी दीवार के रखरखाव के साथ-साथ केंद्र के चार द्वारों का रखरखाव और अनुरक्षण कार्य किया जा रहा है।
संजय गर्ग ने बताया कि पूर्व में भी वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर यह मांग कर चुके हैं कि उनके प्रस्ताव को पूर्व में सहारनपुर के कमिश्नर ने इस कार्य को करने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव को पूरे तथ्यों और आंकड़ों के साथ पत्र भेजा था। कुलपति प्रोफेसर डा. विमला वाई ने बताया कि संजय गर्ग की इस मांग को वह बहुत उपयुक्त मानती हैं। इस पहल से ना केवल विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण कृषि औद्यानिक शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा और इलाके के किसानों, युवाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। ऐसा होने से राज्य सरकार की आधारित आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की नीति को भी बल मिलेगा।

