डाक टिकटों पर भी छाया राम राज्य, भारत के साथ-साथ विश्व के 20 से ज्यादा देशों ने रामायण से जुड़े चरित्रों और कथानकों पर जारी किये हैं डाक टिकट

शि.वा.ब्यूरो, अहमदाबाद। भगवान श्री राम की महिमा डाक टिकटों के माध्यम से भी देश-दुनिया में प्रसारित हो रही है। भारत के साथ-साथ विश्व के 20 से ज्यादा देशों ने रामायण से जुड़े चरित्रों और कथानकों पर समय-समय पर डाक टिकट जारी किये हैं। यानी की डाक टिकटों पर भी राम राज्य छाया हुआ है। उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने रामनवमी पर्व पर बताया कि डाक विभाग लोगों को अपनी विरासत और संस्कृति से जोड़ने के लिए तमाम डाक टिकटें जारी करता है। इसी क्रम में 'श्रीराम जन्मभूमि मंदिर' से लेकर रामायण के विभिन्न प्रसंगों से जुड़े तमाम डाक टिकटों को भी समाहित किया गया है, ताकि युवा पीढ़ी डाक टिकटों के माध्यम से अपनी संस्कृति से अवगत हो सके। ये डाक टिकट पत्रों पर लगकर विदेशों में भी जायेंगे, जहाँ रामायण की गाथा को लोगों तक फैलाएँगे। 
पोस्टमास्टर जनरल ने बताया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 18 जनवरी, 2024 को 'श्रीराम जन्मभूमि मंदिर' को समर्पित 6 विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किए थे। इनमें श्री राम जन्मभूमि मंदिर के साथ भगवान गणेश, भगवन हनुमान, जटायु, केवटराज और माता शबरी पर जारी डाक टिकट शामिल हैं। सोने का वर्क से सुसज्जित और चंदन की खुशबू से सुवासित इन डाक टिकटों में सूर्यवंशी राम के प्रतीक सूर्य की छवि के साथ पुण्य नदी सरयू का चित्र भी है और 'मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी’ चौपाई के माध्यम से राष्ट्र के मंगल की कामना है। इन डाक टिकटों के मुद्रण में अयोध्या की पवित्र मिट्टी और सरयू के पवित्र जल का इस्तेमाल करते हुए इसे पंच महाभूतों के दर्शन से भी जोड़ा गया है। ये डाक टिकट अहमदाबाद जीपीओ स्थित फिलेटली ब्यूरो में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
पोस्टमास्टर जनरल ने बताया कि डाक विभाग ने रामायण के सभी महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाते 11 स्मारक डाक टिकटों का एक सेट भी 22 सितंबर, 2017 को जारी किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे तुलसी मानस मंदिर, वाराणसी में जारी किया था। इन डाक टिकटों में सीता स्वयंवर, राम वनवास, भरत मिलाप, केवट प्रसंग, जटायु संवाद, शबरी संवाद, अशोक वाटिका में हनुमान-सीता संवाद, राम सेतु निर्माण, संजीवनी ले जाते हनुमान, रावण वध व भगवान राम के राजगद्दी पर बैठने के आकर्षक दृश्य समाहित हैं। इन डाक टिकटों पर देखकर ऐसा एहसास होता है मानो पूरा रामराज ही डाक टिकटों पर उतर आया हो। श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या के भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम को अविस्मरणीय बनाने के लिए भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रतिरूप’ पर आधारित कस्टमाइज्ड डाक टिकट जारी किया था ।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि साहित्य और रंगमंच की दृष्टि से राम कथा विश्व के अधिकांश देशों में पहुँच स्थापित करती है। राम-कथा के सूत्र भारत के बाहर श्रीलंका, नेपाल, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, लाओस, जापान, चीन, वियतनाम, सूरीनाम, कंबोडिया और म्यांमार इत्यादि देशों तक भी व्याप्त हैं। ऐसे में विभिन्न देशों ने श्री राम से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर डाक टिकट जारी कर उनके कथानक और विचारों को न सिर्फ आत्मसात किया है, बल्कि डाक टिकटों के माध्यम से उन विचारों और आदर्शों को देश-दुनिया के कोने-कोने में प्रचारित-प्रसारित किया है।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक टिकट को नन्हा राजदूत भी कहा जाता है। देश-दुनिया की सैर करते हुए ये डाक टिकट किसी भी देश की सभ्यता, संस्कृति, विरासत की परम्पराओं को आगे बढ़ाते हुए सांस्कृतिक संदेशवाहक की भूमिका निभाते हैं। विश्व भर के डाक विभाग ने रामायण के विभिन्न पहलुओं पर डाक टिकटों की सीरीज जारी करके श्री राम की आध्यात्मिकता और ऐतिहासिकता को वैश्विक स्तर पर समृद्ध किया है। श्री यादव ने कहा कि, भगवान श्री राम पर जारी डाक टिकट दुनिया भर के डाक टिकट संग्राहकों के लिए एक अमूल्य निधि की तरह है। देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक और शोधार्थी इन डाक टिकटों के माध्यम से रामायण और इसके विभिन्न चरित्रों व कथानकों के महत्व को समझ रहे हैं। भगवान श्रीराम से जुड़ी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व की चीजों को सामने लाकर भारतीय संस्कृति को निरंतर समृद्ध कर रहा है। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छिपी है और इससे युवा पीढ़ी को रूबरू कराने की जरूरत है। इससे युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति एवं विरासत से जुड़ने में मदद मिलेगी।

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