आखिर क्या है लेटते समय क्राॅस लेग का मतलब

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 

आमतौर पर कई लोग चाहे-अनचाहे लेटते समय पैर के ऊपर पैर चढ़ा लेते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया की तरह होता है और लेटते ही अपने आप एक पैर दूसरे पैर के ऊपर चढ़ जाता है। मैं भी ऐसे ही लोगों में से एक हूं। ऐसे ही एक बार मेरे मन में ख्याल आया कि ऐसा क्यों होता है कि लेटते ही एक पैर अपने आप दूसरे पैर के ऊपर आ जाता है। मैंने नोट किया कि इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि दायां पैर बायें पैर के ऊपर आता है या बायां पैर दायें पैर के ऊपर आता है। बस कोई भी पैर ऊपर-नीचे होता रहता है और इसमें सबसे खास बात यह कि लेटते समय क्राॅस लेग की स्थिति ज्यादा आरामदायक लगती है, इसके विपरीत यदि दोनों पैरों को अलग किया जाता है तो स्थिति उतनी आरामदेह नहीं रहती है। कुछ लोगों को पैर मोड़ने की आदत नींद में अधिक सुरक्षित महसूस कराती है।

जिज्ञासावश मैंने लेटते समय क्रॉस लेग होने के सम्बन्ध में कई विभिन्न-विभिन्न लोगों से बात की तो कुछ ने बताया कि क्रॉस लेग (पैर पर पैर चढ़ाकर) करके लेटना या बैठना एक सामान्य आदत है, जो कुछ लोगों को आरामदायक लग सकती है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर मिश्रित प्रभाव पड़ते हैं। आमतौर पर लंबे समय तक इस मुद्रा में रहने से नुकसान अधिक हो सकते हैं। इस सम्बन्ध में एक फीजियोथेरेपिस्ट ने बताया कि कुछ लोगों को सीधे लेटने पर पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है, ऐसे में एक पैर को घुटने से मोड़कर और दूसरे के ऊपर रखकर लेटने से रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर तनाव कम हो सकता है। जिन लोगों को हिप्स में अकड़न महसूस होती है, उनके लिए यह स्थिति थोड़े समय के लिए राहत प्रदान कर सकती है, क्योंकि यह कूल्हे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करती है। 

इस सम्बन्ध में कुछ लोगों का कहना है कि क्रॉस लेग करके लेटने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और यह मुद्रा पैरों को स्थिर रखने में मदद करती है, जिससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है, खासकर तब जब आप थके हों। इसके साथ ही ऐसी मुद्रा में यानी पैर क्रॉस करके लेटने या बैठने से कुछ लोगों को सुकून महसूस होता है। इस सम्बन्ध में एक फीजियोथेरेपिस्ट की मानें तो कुछ लोगों के लिए यह स्थिति बैठने में पीठ के निचले हिस्से को सहारा देने वाली लग सकती है, हालांकि यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। 

क्रॉस लेग करके लेटने रक्त संचार में कमी आ सकती है। उनके अनुसार पैर पर पैर रखकर लेटने से नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे पैरों से दिल तक रक्त का बहाव धीमा हो सकता है। उनके अनुसार लंबे समय तक इस तरह लेटने से नसों में सूजन या वेरिकोज वेन्स की समस्या बढ़ सकती है। उनका मानना है कि ये मुद्रा कूल्हे के एलाइनमेंट को बिगाड़ सकती है, जिससे रीढ़ की हड्डी और कमर में दर्द हो सकता है। उनके अनुसार यह अस्थायी रूप से रक्तचाप को भी बढ़ा सकता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार यदि आप क्रॉस लेग करके लेटते हैं, तो हर कुछ मिनटों में पैर बदलें या पैर सीधे कर लें, ताकि एक तरफ दबाव न पड़े। उनके अनुसार यदि आप करवट लेकर सोते हैं तो पैरों के बीच तकिया रखें, इससे रीढ़ और पेल्विक एलाइनमेंट सही रहता है। एक सामान्य नियम के अनुसार बेहतर नींद और स्वास्थ्य के लिए पैरों को सीधा रखकर लेटना सबसे अच्छा है।

उक्त के सम्बन्ध में ज्योतिषाचार्य पंड़ित लक्ष्मी प्रसाद मैंदुली से जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि ये मुद्रा व्यक्ति की आरामपरस्तता और सुकुन को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि लेटकर आराम करने की ये मुद्रा सबसे उत्तम मानी जाती है। 

इस सम्बन्ध मंे डाॅक्टर शशिकांत वर्मा का कहना है कि ये एक सामान्य प्रक्रिया है और इस पर व्यक्ति का कोई जोर भी नहीं रहता है। बस मस्तिष्क से आदेश होता है और हमें पता भी नहीं चलता है कि कब हमारा कौन से पैर किस पैर के ऊपर आ जाता है यानी क्राॅस लेग की मुद्रा बन जाती है। उन्होंने घोडे का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह एक उत्तम नस्ल का घोडा कभी चारों पैरों पर खड़ा नहीं होता है, वह हर समय एक पैर को आराम की मुद्रा में रखकर बाकी तीन पैरों पर ही खड़ा होता है और इस प्रक्रिया के चलते वह कभी थकता नहीं है। उन्होंने बताया कि इसी के चलते एक अच्छी नस्ल का घोडा कभी बैठता नहीं है, वह हमेशा खड़ा ही रहता है। डाॅ0 शशिकांत वर्मा ने बताया कि लेटते समय क्राॅस लेग की मुद्रा उसी तरह ही पैरों सहित पूरे शरीर को आराम देती है और ये मस्तिष्क के आदेश पर होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है।

लेखक एक उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार है।

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