शि.वा.ब्यूरो, अहमदाबाद। डाक सेवाओं ने पूरी दुनिया में एक लम्बा सफर तय किया है। भारत को यह सौभाग्य प्राप्त है कि दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा यहीं से आरम्भ हुई। पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह ऐतिहासिक घटना 115 वर्ष पूर्व 18 फरवरी 1911 को प्रयागराज में हुई थी। उन्होंने बताया कि संयोग से उस साल कुंभ का मेला भी लगा था और उस दिन फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने एक नया इतिहास रचा था। उन्होंने बताया कि वे अपने विमान में प्रयागराज से नैनी के लिए 6500 पत्रों को अपने साथ लेकर उड़े। पोस्टमास्टर जनरल ने बताया कि विमान था, हैवीलैंड एयरक्राफ्ट। इसने दुनिया की पहली सरकारी डाक ढोने का एक नया दौर शुरू किया।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव के अनुसार प्रयागराज में उस दिन डाक की उड़ान देखने के लिए लगभग एक लाख लोग इकट्ठे हुए थे, जब एक विशेष विमान ने शाम को साढ़े पांच बजे यमुना नदी के किनारों से उड़ान भरी और वह नदी को पार करता हुआ 15 किलोमीटर का सफर तय कर नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा जो प्रयागराज के बाहरी इलाके में सेंट्रल जेल के नजदीक था। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल एक कृषि एवं व्यापार मेला था, जो नदी के किनारे लगा था और उसका नाम यूपी एक्जीबिशन था। पीएमजी कृष्ण कुमार यादव इस प्रदर्शनी में दो उड़ान मशीनों का प्रदर्शन किया गया था। उन्होंने बताया कि विमान का आयात कुछ ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था और इसके कलपुर्जे अलग अलग थे, जिन्हें आम लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्थल पर जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि प्रयागराज से नैनी जंक्शन तक का हवाई सफ़र आज से 115 साल पहले मात्र 13 मिनट में पूरा हुआ था।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि हालांकि यह उड़ान महज छह मील की थी, पर इस घटना को लेकर प्रयागराज में ऐतिहासिक उत्सव सा वातावरण था। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश एवं कालोनियल एयरोप्लेन कंपनी ने जनवरी 1911 में प्रदर्शन के लिए अपना एक विमान भारत भेजा था, जो संयोग से तब प्रयागराज आया, जब कुम्भ का मेला भी चल रहा था। उन्होंने बताया कि वह ऐसा दौर था जब जहाज देखना तो दूर लोगों ने उसके बारे में ठीक से सुना भी बहुत कम था, ऐसे में इस ऐतिहासिक मौके पर अपार भीड होना स्वाभाविक ही था। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में हेनरी ने इतिहास तो रचा ही पहली बार आसमान से दुनिया के सबसे बडे प्रयाग कुंभ का दर्शन भी किया।
पीएमजी कृष्ण कुमार यादव के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया, जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दी थी। उन्होंने बताया कि मेल बैग पर पहली हवाई डाक और उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी इलाहाबाद लिखा था और इस पर एक विमान का भी चित्र प्रकाशित किया गया था, इस पर पारंपरिक काली स्याही की जगह मैजेंटा स्याही का उपयोग किया गया था। उन्होंने बताया कि आयोजक इसके वजन को लेकर बहुत चिंतित थे, जो आसानी से विमान में ले जाया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने बताया कि विमान को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 13 मिनट का समय लगा।
भारत में डाक सेवाओं पर तमाम लेख और एक पुस्तक 'इंडिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़' लिख चुके कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस पहली हवाई डाक सेवा का विशेष शुल्क छह आना रखा गया था और इससे होने वाली आय को आक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। उन्होंने बताया कि इस सेवा के लिए पहले से पत्रों के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी और 18 फरवरी को दोपहर तक इसके लिए पत्रों की बुकिंग की गई। उन्होंने बताया कि पत्रों की बुकिंग के लिए ऑक्सफोर्ड कैंब्रिज हॉस्टल में ऐसी भीड लगी थी कि उसकी हालत मिनी जीपीओ सरीखी हो गई थी। उन्होंने बताया कि डाक विभाग ने यहाँ तीन-चार कर्मचारी भी तैनात किए थे। उन्होंने बताया कि चंद रोज में हॉस्टल में हवाई सेवा के लिए 3000 पत्र पहुँच गए। एक पत्र में तो 25 रूपये का डाक टिकट लगा था। उन्होंने बताया कि पत्र भेजने वालों में प्रयागराज की कई नामी गिरामी हस्तियाँ तो थी हीं, राजा महाराजे और राजकुमार भी थे।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि अहमदाबाद स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस से हवाई जहाज द्वारा प्रतिमाह 20 हजार से ज्यादा डाक बैग देश-विदेश भेजे जा रहे हैं, इनमें 200 से ज्यादा देशों में प्रतिमाह 20 से 25 हजार डाक और पार्सल भेजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें 60 देशों के लिए डायरेक्ट बैगिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं अन्य देशों के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे मुख्य शहरों से विदेशों की फ्लाइट कनेक्टिविटी के हिसाब से डाक विदेशों में भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि फॉरेन पोस्ट ऑफिस अहमदाबाद से प्रतिवर्ष 2 लाख से ज्यादा डाक व पार्सल विदेशों के लिए डिस्पैच किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि देश के भीतर अहमदाबाद से प्रति माह 19 हजार से ज्यादा बैग, जिनमें लगभग 80,000 किलोग्राम वजन के डाक व पार्सल शामिल हैं, जो हवाई जहाज से भेजे जाते हैं।
भारत में डाक सेवाओं पर तमाम लेख और एक पुस्तक 'इंडिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़' लिख चुके कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस पहली हवाई डाक सेवा का विशेष शुल्क छह आना रखा गया था और इससे होने वाली आय को आक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। उन्होंने बताया कि इस सेवा के लिए पहले से पत्रों के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी और 18 फरवरी को दोपहर तक इसके लिए पत्रों की बुकिंग की गई। उन्होंने बताया कि पत्रों की बुकिंग के लिए ऑक्सफोर्ड कैंब्रिज हॉस्टल में ऐसी भीड लगी थी कि उसकी हालत मिनी जीपीओ सरीखी हो गई थी। उन्होंने बताया कि डाक विभाग ने यहाँ तीन-चार कर्मचारी भी तैनात किए थे। उन्होंने बताया कि चंद रोज में हॉस्टल में हवाई सेवा के लिए 3000 पत्र पहुँच गए। एक पत्र में तो 25 रूपये का डाक टिकट लगा था। उन्होंने बताया कि पत्र भेजने वालों में प्रयागराज की कई नामी गिरामी हस्तियाँ तो थी हीं, राजा महाराजे और राजकुमार भी थे।
पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि अहमदाबाद स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस से हवाई जहाज द्वारा प्रतिमाह 20 हजार से ज्यादा डाक बैग देश-विदेश भेजे जा रहे हैं, इनमें 200 से ज्यादा देशों में प्रतिमाह 20 से 25 हजार डाक और पार्सल भेजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें 60 देशों के लिए डायरेक्ट बैगिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं अन्य देशों के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे मुख्य शहरों से विदेशों की फ्लाइट कनेक्टिविटी के हिसाब से डाक विदेशों में भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि फॉरेन पोस्ट ऑफिस अहमदाबाद से प्रतिवर्ष 2 लाख से ज्यादा डाक व पार्सल विदेशों के लिए डिस्पैच किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि देश के भीतर अहमदाबाद से प्रति माह 19 हजार से ज्यादा बैग, जिनमें लगभग 80,000 किलोग्राम वजन के डाक व पार्सल शामिल हैं, जो हवाई जहाज से भेजे जाते हैं।

