मोक्षायतन योगाश्रम में उत्तरायण सूर्य का स्वागत किया

गौरव सिंघल, सहारनपुर। मकर संक्रांति पर उत्तरायण सूर्य मुक्ति का मार्ग देता है। महीनों शर शैय्या पर लेटे रहे भीष्म पितामह ने प्राण त्याग के लिए ये दिन चुना। राजा भागीरथ इसी दिन पतित पावनी गंगा को समुद्र तक लेकर पहुंचे और कपिल मुनि के आश्रम में राजा सागर के साठ हजार पुत्रों का उद्धार किया। मोक्षायतन योग संस्थान में भीषण कोहरे के बावजूद आज तड़के से ही आयोजित मकर संक्रांति महोत्सव में यह जानकारी देते हुए योग गुरु पदमश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि हम बहुत जल्दी ऐसा सोच लेते हैं कि आज सूरज नहीं निकला, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि किसी कोहरे और किसी बादल में सूर्य को ढकने की सामर्थ्य नहीं है, वह सदैव अपने निर्धारित समय पर ही उदय होता है। उन्होंने कहा कि अपनी तरह के इस अनूठे कार्यक्रम में उपस्थित साधकों ने सूर्य स्तुति और सूर्य आराधन मंत्रों के साथ सभी ने सूर्य को अर्घ्य दिया। उन्होंने कहा कि मौजूद साधकों ने वर्षभर में बारह राशियों में भ्रमण के कारण बारह नामों से सूर्य की भारत योग ऊर्जागति का अभ्यास करके सामूहिक खिचड़ी सेवन का आनंद लिया। 

इस अवसर पर योगगुरु भारत भूषण ने खिचड़ी को सामाजिक संवाद और समरसता का प्रतीक बताते हुए इसे सशक्त समाज के निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि आपस में खिचड़ी पकनी बंद हो जाए तो परिवार और समाज टूटकर बिखर जाते हैं। खिचड़ी तेरे चार यार घी, पापड़, दही, अचार का उदाहरण देकर योग गुरु भारत भूषण बोले कि खिचड़ी में भी रस तभी पैदा होता है जब उसके चार यार उसके साथ हों। उन्होंने कहा कि ये पारस्परिक संवाद ही संबंध संवेदना और प्रेम व करुणा उत्पन्न करने वाला है इसीलिए मकर संक्रांति के दिन कम्बल, घी, तिल और अन्य जीवन धारण करने में उपयोगी अन्न जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा हमारी संस्कृति में है। 

इस अवसर पर अधिष्ठाता नन्द किशोर शर्मा, योगाचार्य अनीता शर्मा, आलोक श्रीवास्तव और संतोष त्यागी ने इसे साधकों के लिए ठिठुरन से बाहर निकालकर पुनः नए उत्साह से साधना आरंभ करने का आवाहन किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री संजय गर्ग, ललित वर्मा, ध्यान प्रमुख विजय सुखीजा, शिवम सैनी, केशव वर्मा, यश राणा आदि के अलावा बड़ी संख्या में नेशन बिल्डर्स एकेडमी के बच्चों ने भी भाग लिया।

Post a Comment

Previous Post Next Post