राष्ट्रीय युवा दिवस पर मोक्षायतन में राष्ट्रपुरुष आराधन किया

गौरव सिंघल सहारनपुर। भारतीय अध्यात्म, वेदांत और संस्कृति प्रचारक और परम ओजस्वी स्वामी विवेकानंद का जन्मोत्सव मोक्षायतन योग संस्थान में राष्ट्रवंदना के शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार कर मनाया गया। विश्व योग गुरु पदमश्री स्वामी भारत भूषण के पावन सान्निध्य में विवेकानंदी पगड़ियां धारण किए हुए उन्हीं के रंग में रंगे वक्ता और श्रोताओं का आज अलग ही आभामंडल देखने को मिला। आयोजन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने स्वामी स्वामी विवेकानंद के जीवन के संस्मरण सुनाए व भारतीय दर्शन के  सूक्ष्म तत्वों का विवेचन करते हुए बताया कि उनके विज्ञान की कसौटी पर की गई हिंदुत्व की व्याख्या ने हमेशा के लिए पाश्चात्य श्रोताओं का दिल जीत लिया, वह भी ऐसे समय में जब भारत पराधीन था और भारत को हेय दृष्टि से देखा जाता था। 

उन्होंने कहा कि ये गर्व की बात है कि वर्तमान काल का भारत पुनः अपने वैभव को प्राप्त कर रहा है। इस अवसर पर वरिष्ठ साधक और महानगर अध्यक्ष रहे भाजपा हेमंत अरोड़ा ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के विषय में बताया कि वे ईश्वर को पाने की चाह में  लौकिक जगत व अध्यात्म की दुविधा में  संघर्ष से पार होकर मुक्ति के मार्ग पर चलकर मात्र ३९ वर्ष की आयु में एक ऐसे वैश्विक महामानव बनकर ब्रह्मलीन हुए जिन्हें अमेरिका ने तूफानी हिंदू कहकर उनका परिचय दिया। योगाचार्य अनीता शर्मा ने कहा कि स्वामी जी ने हिंदुत्व की उदारता और आध्यात्मिकता की शक्ति को वैश्विक सोच को झंकृत करने वाला बताया। अधिष्ठाता एन के शर्मा ने कि स्वामी विवेकानंद से प्रभावित होकर ही वंदनीय गुरुदेव ने कठोपनिषद के सूत्रवाक्य उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान निबोधत को हम साधकों के लिए मोक्षायतन संस्थान का सूत्र वाक्य बनाया। अमरनाथ इंजीनियर ने कहा कि हमे जन-जन के हृदय में वास करने वाले स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना है जबकि ललित वर्मा ने कहा कि स्वामी जी के वैश्विक संबोधन ने दुनिया को तो भारतीय जीवनदर्शन की महिमा से परिचय कराया लेकिन उन्होंने भारतीयों को भी ऐसा आईना दिखाया कि सांस्कृतिक धरोहर को ठीक से संभालने के लिए स्वयं को तैयार करें। इस विवेकानंद संवाद श्रृंखला को खुशबू, पूनम वर्मा, ऋषिपालसिंह, सीमा गुप्ता, मनोज कुमार, रमन शर्मा और विष्णु वर्मा ने भी संबोधित किया। 

पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि मेरे जीवन की उपलब्धि विवेकानंद जी को सराहना नहीं उन्हें अपनाना रही और शायद उसी ने यह दिन दिखाया कि मुझे विदेश यात्रा का पहला निमंत्रण शिकागो से मिला जहां स्वामी जी ने विश्वधर्म सम्मेलन में दुनिया के चिंतन को झकझोरने वाला संबोधन दिया था। उन्होंने कहा कि आज विश्व में भारत के तेजी से बढ़ते वर्चस्व का कारण भी यही है कि इस युग के नरेंद्र के नेतृत्व में भारत ने अपनी विरासत पर गर्व करना सीख लिया है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रयज्ञ की अग्नि द्वारा राष्ट्रपुरुष आराधन के साथ हुआ।

Post a Comment

Previous Post Next Post