गौरव सिंघल, सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 2026 के दीवार कैलेण्डर और टेबल कलेण्डर दोनों में सहारनपुर मण्डल को विशेष महत्व दिया गया है। इस वर्ष की शासन की थीम है, “विरासत भी विकास भी”। राज्य सरकार प्रदेश में धरोहर संरक्षित करने के साथ ही प्रदेश का समग्र विकास कर रही है। इसी को ध्यान में रखकर दोनों कैलेण्डर की सामग्री आकृषक और प्रभावी ढंग से तैयार की गयी है। जो नागरिकों के मन को बहुत ही आकृषित करती है और आनंद देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहारनपुर मण्डल को प्राथमिकता के आधार पर रखते हुए इन स्थलों के विकास पर स्वयं दृष्टि रखे हुए है। उन्होंने माँ शाकम्भरी देवी स्थल और शुक्रताल तीर्थ के विकास को अपनी सरकार में उच्च स्तरीय प्राथमिकता दी है और करोड़ों रूपये की लागत से दोनों स्थानों पर तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए विकास एवं सौन्दर्यीकरण कार्य किए जा रहे है।सहारनपुर के मण्डलायुक्त डॉ0 रूपेश कुमार, जिलाधिकारी मनीष बंसल एवं मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा किए गये सतत प्रयासों से विरासत एवं विकास की डोर में मजबूती आई। जिलाधिकारी सहारनपुर मनीष बंसल ने बताया कि सहारनपुर में स्थित माँ शाकम्भरी सिद्धपीठ के रूप में स्थापित है। यहां पर निरंतर विकास कार्य किया जा रहा है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को अत्याधिक सुविधाएं मिल सकें। यहां स्थित विश्वविद्यालय मण्डल का प्रथम विश्वविद्यालय है जोकि शिक्षा के दृष्टिकोण से छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित होगा। खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला के निर्माण से यथाशीघ्र खाद्य पदार्थों की जांच कर रिपोर्ट प्राप्त की जा सकेगी। डॉ0 भीमराव अम्बेडकर स्पोर्टस स्टेडियम खेल के क्षेत्र में जनपदवासियों के लिए प्रगति में साधक बनेगा।
जिला सूचना अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता ने जानकारी दी कि सहारनपुर मण्डल की अनूठी विरासतों और बडे स्तर पर किए जा रहे विकास कार्यों को दिखाते हुए उनके आकृषक चित्र दोनों कैलेण्डरों में प्रमुखता से शासन द्वारा शामिल किए गये है। यह सहारनपुर मण्डल के लिए खास उपलब्धि है। दिलीप कुमार गुप्ता के मुताबिक माह अप्रैल का पेज सहारनपुर जनपद को मिला है। जिस पर माँ शाकम्भरी देवी की प्रतिमाओं के साथ-साथ माँ शाकुम्बरी राजकीय विश्वविद्यालय, डॉ0 भीमराव अम्बेडकर स्पोर्टस स्टेडियम सहारनपुर और नव निर्मित खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला नानौता शामिल है। जबकि सहारनपुर मण्डल के मुजफ्फरनगर जनपद को कलेण्डर में दिसम्बर माह का पेज आवंटित हुआ है। इस पेज पर महाभारत कालीन प्रमुख तीर्थ स्थल शुक्रताल स्थित पांच हजार वर्ष पुराने वटवृक्ष, शुक्रताल धाम, शुक्रताल घाट, अटल आवासीय विद्यालय और गो अभ्यारण्य जैसे प्रमुख स्थानों के चित्र प्रदर्शित किए गये है। शुक्रताल वह स्थान है जहां वीर अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित को शुकदेव मुनि ने पांच हजार एक सौ पच्चीस वर्ष पूर्व भागवत कथा सुनाई थी। वह वट वृक्ष आज भी कायम है। जिसके दर्शन के लिए देश भर से हजारों यात्री रोज शुक्रताल पंहुचते है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रमुख संत स्वामी कल्याण देव की भी शुक्रताल कर्मस्थली रही है।

