शि.वा.ब्यूरो, मालवा (मध्यप्रदेश)। एक ओर जहाँ गणित को कठिन विषय मानकर छात्रों में भय व्याप्त है वहीं दूसरी ओर आगर मालवा के नवाचारी शिक्षक डाॅ दशरथ मसानिया ने इसे कविताओं में बांधकर सरल,रुचिकर और ग्राह्य बना दिया है जिसे संगीत मे भी गाकर जोड़ा जा रहा है।
सर्व प्रथम रामानुजम् जयंती पर 12/12/11को 25 दोहों का प्रकाशन हुआ, फिर अप्रैल 2012 को मासिक बाल पत्रिका देवपुत्र ने प्रकाशित कर देश भर में जन-जन तक पहुँचाया। बाद में इस शोध नवाचार का विस्तार होता गया, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में और सोशल मीडिया मे भी स्थान पाने लगा। गूगल,फेसबुक,यू ट्यूब आदि मे भी देखा जा सकता है। इसके बाद 'गणित ज्ञान को गाइये' पुस्तिका के रुप मे शिक्षा जगत में लोकप्रिय होता जा रहा है, जिसके तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके है। मजेदार और दिलचस्प बात यह है कि इसे देश भर मे शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए स्कूलों की दीवारों पर लिखा जाने लगा है, जिसे छात्रों मे मनोरंजन के रुप में गाया जा रहा है। खेल खेल में सीखने की नयी विधि है। बीच मे संख्या ज्ञान तथा पहाड़े की विशेष टेबल भी है।
पुस्तिका को नौ शीर्षकों मे रखा गया है-
1 गणित चालीसा (तीन दोहे और 40 चौपाई)
2-अवधारणायें ( 12 दोहे )
3-परिभाषाये (10 दोहे)
4- गणित के सूत्र (11दोहे)
5-संख्या विभाजन के नियम (5 दोहे) तथा टेबल
6- 1 से 100 पहाड़े लिखने की 5 विधियाँ तथा टेबल (6 दोहे)
7- संख्या ज्ञान तथा टेबल (6दोहे)
8- गणित के रोचक फंडे (7 दोहे)
9-गणितज्ञों के सचित्र नाम (6 दोहे )
संक्षेप मे कहा जा सकता है कि डाॅ .मसानिया कृत इस शोध नवाचार का लाभ देश के सभी शिक्षकों तथा छात्रों तक पहुँचाया जाना चाहिए। शासन को इसे छात्र हित मे पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल करना चाहिए।