करोड़पति परिवार का 11 साल का बालक तीन साल बाद चाय की दुकान पर काम करता मिला

गौरव सिंघल, नागल जिले के थाना नागल के गांव पांडोली निवासी तीन साल से लापता 11 वर्षीय बालक शाहजेब बिरान कलियर में बदहाली की हालत में चाय की एक दुकान पर काम करता हुआ मिला। बरामदगी के बाद जब यह बालक अपने परिजनों के पास पहुंचा तो सभी उससे मिलकर गदगद थे। दुखद बात यह है कि इन तीन सालों के दौरान उसके पिता नावेद जो मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे और अपने इकलौते बेटे शाहजेब और अपनी पत्नी इमराना के गम में दिसंबर 2019 में मर गए थे। डेढ़ साल पहले शाहजेब की मां इमराना का बिरान कलियर में ही कोरोना काल में निधन हो गया था। 

बालक के छोटे दादा शाह आलम ने आज पत्रकारों को बताया कि अभी एक-दो दिन पहले ही उनका दामाद मोबीन बिरान कलियर की दरगाह पर गया था। जहां उसे दरगाह समिति के पदाधिकारी मुनव्वर के घर के बाहर शाहजेब उसे मिल गया और उसकी सूचना पर अन्य परिजन भी बिरान कलियर गए। शाहजेब को अपने घर ले आए।

शाहजेब के दादा याकूब ने इस बालक शाहजेब के नाम 75 लाख रूपए की संपत्ति वसीयत कर दी थी और उन्हें भरोसा था कि एक ना एक दिन उनके खानदान का चिराग शाहजेब जरूर घर लौटेगा। याकूब अब इस दुनिया में नहीं हैं। उसकी देखभाल और परवरिस की जिम्मेदारी उसके छोटे दादा शाह आलम और चाचा जावेद के ऊपर आ गई है। अब यह परिवार सहारनपुर में देहरादून रोड़ पर रह रहा है। इस तरह से तीन साल की गुमशुदगी के बाद शाहजेब जब अपने घर पहुंचा तो उसके पिता नावेद और दादा याकूब उसे देखने के लिए इस दुनिया में नहीं थे।

जानकारी के मुताबिक नावेद का निकाह कुछ वर्ष पूर्व इमराना के साथ हुआ था। जुलाई 2019 को इमराना अपने आठ साल के बेटे शाहजेब को लेकर घर में बिना किसी को बताए अपने मायके यमुना नगर चली गई थी और वह अपने मायके से भी इमराना चुपचाप अपने बेटे शाहजेब को लेकर बिरान कलियर रूड़की चली गई थी और वहां दरगाह की साफ-सफाई कर बेटे के साथ रह रही थी। अपनी मां की मौत के बाद शाहजेब ने उसी दरगाह पर काम किया और मांग कर जीवन गुजारा और वहीं पर शहजाद की दुकान पर नौकरी करने लगा। घर से फरारी के दौरान शाहजेब गांव पांडोली की कक्षा दो का छात्र था। अब उसने उच्च शिक्षा ग्रहण करने और डाक्टर बनने का इरादा जाहिर किया है। उसके छोटे दादा शाह आलम ने कहा कि वह अपने पोते शाहजेब का सपना पूरा करने का प्रयास करेंगे।

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