गौरव सिंघल, देवबंद। पर्यावरण प्रेमी शशांक जैन ने कहा कि बरसात के दिनों में लोगों को जमकर पौधारोपण करना चाहिए, क्योंकि बरसात का मौसम पेड-पौधें लगाने के लिए सबसे आदर्श समय माना गया है। इस दौरान वातावरण में नमी और बारिश का प्राकृतिक पानी पौधों को आसानी से पनपने में मदद करता है। पर्यावरण प्रेमी शशांक जैन ने आज वरिष्ठ पत्रकार गौरव सिंघल से खास बातचीत में कहा कि बरसात के मौसम में बार-बार बारिश आने के कारण वातावरण बदल जाता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। उन्होंने कहा कि भरपूर पानी मिलने से पेड़-पौधे और फसलें खूब फलती-फूलती हैं। नदियाँ और झीलें भर जाती हैं, जिससे पीने और सिंचाई के लिए पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में नमी होने के कारण पौधे बहुत आसानी से मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण पौधों को बार-बार सींचने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी और समय दोनों की बचत होती है।
शशांक जैन ने कहा कि बारिश के पानी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों के विकास के लिए टॉनिक का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ताजी ऑक्सीजन देते हैं, जिससे प्रदूषण कम होता है और वातावरण शुद्ध रहता है। शशांक जैन ने कहा कि बारिश के मौसम में पौधे लगाने और बागवानी करने से तनाव भी कम होता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शशांक जैन ने कहा कि पौधारोपण करने के बाद लगाए गए पौधों की देखभाल करना भी बेहद जरूरी है। शशांक जैन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अभी आम और जामुन का सीजन चल रहा है। इन दोनों को खाने के बाद इनकी गुठलियों को कूड़े में न डाले बल्कि इन्हें सुखा ले और जब भी कहीं घर से बाहर जाए, उन्हें अपने साथ लेकर जाएं। उन्हें सड़क के किनारे, रेल मार्गों के किनारे या जंगल में डाल दें। उन्होंने कहा कि इससे यह फायदा होगा कि यदि आपने 100 गुठली डाली और उसके बाद 10 पेड़ भी बने तो कितने पेड़ होंगे और आगे फल और छाया व पर्यावरण की समस्या का समाधान भी हो सकता है। शशांक जैन ने कहा कि आज हम सभी लोगों को पर्यावरण के प्रति बहुत अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है। पर्यावरण बचेगा तो प्रकृति बचेगी, प्रकृति बचेगी तो जीव-जंतुओं और मानव का भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से हमें शुद्ध हवा, पीने योग्य पानी, उपजाऊ मिट्टी, और जलवायु स्थिरता मिलती है, जो हमारे स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए सबसे ज़रूरी है।
