डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
ओशो इस संसार में,भूले भटके लोग।
ईश छोड़ निंदा करें, नजरों से संभोग।।
धर्मों को धंधा बना, करते हैं व्यापार।
आपस में सब लड़ रहे,संत भये बहार।।
भारत जैसे देश में, मिलकर रहते आज।
खाडी खूनों से सजी,करम धरम के काज।।
नर नारायण एक हैं,मत समझो कोई दोय।
एक सबको दिख रहा,दूजा हिय में होय।।
शत-शत वंदन आपका, सांस सांस में आप।
मन मतंग वश में करो,एक यही संताप।।
भगवन तेरा आसरा, लाखों की दी देह।
हम आभारी आपके, आंखों बरसे नेह।।
प्राचार्य एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी बडोद, आगर (मालवा) मध्यप्रदेश
