गणितज्ञ-खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी आयोजित, भारतीय विज्ञान में उनके योगदान पर प्रकाश डाला

गौरव सिंघल, देवबंद। सुधार एक प्रयास के तत्वावधान में संत नगर स्थित कार्यालय पर महान गणितज्ञ-खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता लोकेश वत्स एडवोकेट ने की, जबकि संचालन पृथु शर्मा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने आर्यभट्ट के जीवन, कृतित्व और भारतीय विज्ञान में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। लोकेश वत्स एडवोकेट ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आर्यभट्ट ने 1500 वर्ष पूर्व ही बता दिया था कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। हमें ऐसे वैज्ञानिकों की विरासत को युवाओं तक पहुंचाना होगा। स्तुति शर्मा ने कहा कि आर्यभटीय ग्रंथ में π का मान और शून्य की अवधारणा विश्व को भारत की देन है। यह हमारे गौरव का विषय है। रविंद्र कश्यप एडवोकेट ने अपने संबोधन में कहा कि आर्यभट्ट ने न केवल खगोल बल्कि गणित को भी नई दिशा दी। उनके बिना आधुनिक विज्ञान की कल्पना अधूरी है। मुकुल गोयल ने विचार व्यक्त किए कि स्कूल-कॉलेजों में आर्यभट्ट जैसे मनीषियों पर नियमित संगोष्ठियां होनी चाहिए ताकि बच्चे प्रेरित हों। विपिन कुमार ने कहा, आर्यभट्ट ने सिद्ध किया कि भारतीय मेधा सदैव विश्व का मार्गदर्शन करती रही है। अमित कुमार ने कहा, सुधार एक प्रयास का यह आयोजन सराहनीय है। हमें अपनी वैज्ञानिक परंपरा को जन-जन तक ले जाना है।
गोष्ठी में वत्सल शर्मा, अनुराधा शर्मा, भारती शर्मा, मोहित कुमार, अमन कुमार, नितिन कश्यप आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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