जिलाधिकारी ने फीता काटकर किया आरोग्य मेले का शुभारम्भ, हीट वेव के लक्षण एवं सुरक्षित बचाव के उपाय बताए

गौरव सिंघल, सहारनपुर। जिलाधिकारी  अरविंद कुमार चौहान द्वारा 28 अप्रैल से 03 मई तक श्रमिक आरोग्य मेले के अन्तर्गत जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर श्रमिकों हेतु उनके कार्य स्थल पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी अरविन्द कुमार चौहान ने इण्डियन हबर्स फैक्ट्री दारा शिवपुरी नवादा रोड में स्वास्थ्य शिविर का फीता काटकर उद्घाटन किया गया। जिलाधिकारी अरविन्द कुमार चौहान द्वारा अवगत कराया गया कि स्वास्थ्य शिविर जनपद के साथ-साथ समस्त ब्लॉकों पर विभिन्न फैक्ट्रियों, औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक वर्ग के कर्मियों हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा। उन्होने कहा कि श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच बेहतर तरीके से की जाए। इसके साथ ही आवश्यक दवाओं को उपलब्ध करवाया जाए। 

स्वास्थ्य शिविरों में श्रमिकों की स्वास्थ्य की जांच, निदान एवं उपचार किया जा सकें तथा सभी उपस्थित श्रमिकों को हीटवेव से बचने एवं उसके उपाय के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गयी, कि हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है। इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा स्वास्थ्य शिविर में लगाए गये स्टाल का निरीक्षण भी किया। इसके तहत उपलब्ध दवाओं की जानकारी ली एवं स्वयं कुछ दवाओं की एक्सपायरी डेट भी देखी। इण्डियन हबर्स फैक्ट्री में लगाये गये स्वास्थ्य शिविर में चर्म रोग-27, शुगर जाँच-68 (जिसमें 5 पोजिटिव), आँख-125 कुल 147 रोगी देखे गये जिनकी बुखार, बी०पी०, शुगर व अन्य जांचे की गयी। ब्लॉक पुवॉरका, नागल, सुनहैटी खडखडी, सरसावा, नकुड आदि समस्त ब्लॉकों विभिन्न औद्योगिक कार्य क्षेत्रों में श्रमिकों हेतु स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० प्रवीण कुमार द्वारा जानकारी दी गयी कि राज्य सरकार के आदेशों के क्रम में 03 मई तक जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर स्थापित फैक्ट्रीयों एवं श्रमिकों के कार्य स्थलों पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जायेगा। इसके प्रभाव को कम करने के लिये प्रचार माध्यमों पर हीट वेव व लू की चेतावनी पर ध्यान दें। अधिक से अधिक पानी पिएं, यदि प्यास न लगी हो तो भी पानी पिएं, हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें, धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ, पैरों को गीले कपडे से ढके रहे तथा छाते का प्रयोग करें। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ अवश्य ले जाये। हीट स्ट्रोक, हीट रेश, हीट केम के लक्ष्णों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचाने। यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते है तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह लें।
स्वास्थ्य शिविर में अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा० कुमुद रंजन, जिला मलेरिया अधिकारी शिवाँका गौड, निदेशक इंडियन हर्ब्स सहारनपुर सुधाकर अग्रवाल, लघु उद्योग भारती से अनुपम गुप्ता उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि गर्म, लाल शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना। तेज पल्स होना। (नाडी गति तेज होना), उथले श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मतली, थकान और कमजोरी होना, चक्कर आना  मूत्र ना होना अथवा इसमें कमी हीट स्ट्रोक के लक्षण है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी पीयें, पसीना सोखने वाले पतले व हल्के रंग के वस्त्र ही पहने, तेज धूप में निकलने से बचे, अगर तेज धूप में निकलना जरूरी है तो निकलते वक्त छाता लगा लें या टोपी पहन ले एवं ऐसे कपडे जिससे शरीर अधिक से अधिक ढका रहे, यात्रा करते समय अपने साथ पर्याप्त मात्रा में पीने का स्वच्छ पानी रखे।
5. ओ०आर०एस० घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी, नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें। ताकि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके, श्रमसाध्य कार्यों को ठंडे समय मे करने की प्रयास करें, कार्यस्थल पर पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था करें, कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें, पंखे, गीले कपड़ों का उपयोग करें तथा स्नान करे व यदि सम्भव हो तो दोपहर 11.00 बजे से अपरान्ह 4.00 के मध्य धूप में निकलने से बचे।
उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक से बचने के लिए मनुष्य के शरीर के उच्च तापमान को नियंत्रित कर 100 डिग्री फा० तक रखने का प्रयास करें, मरीज को ठण्डी जगह में रखें, मरीज को ठण्डी हवा करें तथा उसके शरीर को स्पंज अथवा गीले कपडे से पोछें व मरीज को ठण्डे पानी के टब में रखे अथवा उसके ऊपर बर्फ की पट्टी रखें जब तक की उसका तापमान 100 डिग्री फा० तक न हो जाए।

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