इस वर्ष का स्वामी रौद्र संवत्सर में दिखायेगा अपने रंग

हवलेश कुमार पटेल, खतौली। ज्योतिषविद्वों के बीच अभी बीते वर्ष यानी होलिका दहन को हुए चन्द्रग्रहण की चर्चा समाप्त भी नहीं हुई थी कि चैत्र नवरात्र यानी 19 मार्च से आरम्भ हुए नव नवसंवत्सर 2083 ने उनके मुख की मुद्रा और अधिक गम्भीर कर दिया है। हालांकि संवत्सर 2083 में दो सूर्य व एक चन्द्र ग्रहण को मिलाकर तीन ग्रहण पृथ्वी पर पडेंगे, जिनमें से एक सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 व 6 फरवरी 2027 को दूसरा सूर्य ग्रहण होगा, इसके साथ ही एक चन्द्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को होंगा, लेकिन तीनों ही ग्रहण भारत मंे गोचर नहीं होंगे, इसलिए इस विषय में चिन्ता की कोई बात नहीं है।
ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि इस बार संवत्सर 2083 का नाम रौद्रसंवत्सर है और इस संवत्सर का फल अच्छा नहीं माना जाता है। कहा गया है कि -
रौद्रेब्देनपसंभूतक्षोभ क्लेश समन्विते। 
सततंत्वखिलालोकामध्यसस्यार्धवृष्टयः।।

यानी रौद्र नामक संवत्सर में राजाओं में क्षोभ होगा और क्लेश बढ़ेगा और अन्न-जल की किल्लत भी हो सकती है। ज्योतिषविद्व लक्ष्मी प्रसाद मैंदुली की मानें तो इस वर्ष मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु व मीन राशि वालों को लाभ अधिक और हानि कम होने के चांस हैं। इसके साथ वृष, तुला, मकर व कुंभ राशि वालों को लाभ कम और हानि अधिक होने के आसार हैं। उनका मानना है कि इस वर्ष कर्क राशि वाले जातकों को लाभ व हानि के लगभग बराबर अवसर प्राप्त होंगे। 

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