श्री राम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के तत्वाधान में जगरूकता सत्र आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर वर्तमान डिजिटल युग में तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए संस्थान में “AI Ethics, Safety, Sustainability and Responsible Use ” विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं तकनीकी पेशेवरों को ए0आई0 के नैतिक, सामाजिक एवं व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना तथा इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसके पश्चात संस्थान के निदेशक प्रो0 एसएन चौहान ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, उद्योग, कृषि, प्रशासन और सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में एआई आधारित प्रणालियाँ निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया जाए।

मुख्य वक्ता डॉ0 आरसी कश्यप, पूर्व प्रोफेसर सॉल्टलेक विश्वविद्यालय कोलकाता ने कहा कि एआई के माध्यम से जहाँ एक ओर कार्यक्षमता, सटीकता और नवाचार को बढ़ावा मिला है, वहीं दूसरी ओर डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात (।Algorithmic Bias), फेक न्यूज, डीपफेक और स्वचालित निर्णय प्रणालियों जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ए0आई0 का विकास और उपयोग बिना उचित दिशा-निर्देशों के किया गया तो यह सामाजिक असमानता और नैतिक संकट को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों ने एआई एथिक्स पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी भी ए0आई0 प्रणाली का निर्माण करते समय निष्पक्षता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का पालन अनिवार्य है। वहीं ए0आई0 सुरक्षा के अंतर्गत उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ए0आई0 आधारित सॉफ्टवेयर और सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे मानव के लिए सुरक्षित हों और किसी भी प्रकार की हानि या दुरुपयोग की संभावना न्यूनतम हो। एआई का उत्तरादायित्वपूर्ण उपयोग विषय पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एआई0का प्रयोग केवल सुविधा और लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानव कल्याण, सामाजिक विकास और नैतिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए। छात्रों को यह संदेश दिया गया कि वे ए0आई0 का उपयोग नकल, गलत सूचना या अनैतिक कार्यों के लिए न करें, बल्कि इसे नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए अपनाएँ।
कार्यक्रम के संचालक ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता सत्रों का आयोजन छात्रों को भविष्य की तकनीकों के प्रति न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाता है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की और विषय से संबंधित अपने विचार साझा किए। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने एआई के व्यावहारिक उपयोग, नैतिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं प्रभावी ढंग से समाधान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यक्रम में इं0 कनुप्रिया, इं0 आशीष चौहान, डॉ0 अंकुर कुमार, इं0 पवन कुमार तथा इं0 फिरोज अली एवं अन्य सभी शिक्षक का विशेष सहयोग रहा। 

Post a Comment

Previous Post Next Post