उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल, सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई, श्रद्धा सुमन अर्पित किये

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अतिशय क्षेत्र वहलना के सभागार में बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉ0 राजीव कुमार द्वारा  एनएसएस कैम्प में  प्रतिभाशाली बालिका सम्मान समारोह  का आयोजन किया गया, जिसमे प्रतिभाशाली बालिकाओं को समान्नित किया गया। स्वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध कवियत्री एवं राजनेता सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये गए। डॉ0 राजीव कुमार, डॉ0 वर्चसा सैनी एवं ज़ैनब द्वारा भारत कोकिला को श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया गया।

डॉ0 राजीव कुमार ने बताया कि सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने बताया कि वे एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री और राजनेता रही हैं, जिन्हें महात्मा गांधी ने भारत कोकिला कहा। उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडु  स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं, सरोजनी नायडु को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनने का गौरव मिला था। उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडु के माता पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय और वरदा सुन्दरी था। उन्होंने बताया कि इस दमपत्ति की आठ संतानों में वे सबसे बड़ी थीं। उन्होंने बताया कि पिता अघोरनाथ एक वैज्ञानिक और शिक्षाशास्त्री थे। वह कविता भी लिखते थे। इधर माता वरदा सुन्दरी भी कविता लिखती थीं। इसके अलावा भाई हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय भी कविताएं लिखते थे, यही कारण था कि सरोजनी नायडु भी इस क्षेत्र में पारंगत थीं।
उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडु ने मात्र 12 वर्ष में ही मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी और मद्रास प्रेसीडेंसी में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद हायर स्टडी के लिए उन्हें इंग्लैंड भेजा गया, जहां उन्होंने क्रमश: लंदन के 'किंग्ज कॉलेज में और उसके बाद 'कैम्ब्रिज के गर्टन कॉलेज' में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बताया कि कॉलेज की शिक्षा में सरोजिनी की विशेष रुचि नहीं थी और इंग्लैंड का ठंडा तापमान उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं था, इसलिए वे स्वदेश लौट आईं।
उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडु का विवाह सरोजिनी नायडु का विवाह डॉ. गोविन्दराजुलु नायडू से हुआ, जो कि एक फौजी डॉक्टर थे। उन्होंने बताया कि गोविन्दराजुलु ने तीन साल पहले सरोजिनी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया कि पहले तो सरोजिनी के पिता इस विवाह के विरुद्ध थे लेकिन बाद में वे सहमत हो गए। उन्होंने बताया कि वह उर्दू शायरी की शौकीन थीं,वह ज्यादातर अंग्रेजी में भाषण दिया करतीं थीं,उर्दू भाषा के प्रति भी वह बड़ी आकर्षित थीं और उर्दू पर बहुत अच्छी पकड़ थी। उन्होंने बताया कि सरोजिनी नायडू को उनकी अत्यंत मधुर, गीतात्मक और भावपूर्ण कविताओं के कारण महात्मा गांधी द्वारा भारत की कोकिला कहा गया था। 
अंग्रेजी में उत्कृष्ट काव्य लेखन, जिसमें देशप्रेम, प्रकृति और प्रेम का चित्रण था, ने उन्हें यह उपाधि दिलाई।

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