शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एक पुराने गाने सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया की तर्ज पर आखिर जिलाधिकारी द्वारा 22 दिसम्बर को गठित की गयी टीम ने आज आरडीएफ उपयोग करने वाली पेपर इकाईयों का निरीक्षण नगर मजिस्ट्रेट की अगुवाई में किया। निरीक्षण के दौरान टीम में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चन्द्रा सहित विभागीय सहायक पर्यावरण अभियन्ता, अवर अभियन्ता, सम्भागीय परिवहन अधिकारी एवं नगर पालिका परिषद के टैक्स कलैक्टर मौजूद रहे। टीम द्वारा मै0 शाकुम्बरी पेपर, मै0 एरिस्टो क्राफ्ट पेपर, मै0 गैलेक्सी पेपर एवं मै0 कृष्णांचल पेपर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शाकुम्बरी पेपर, एरिस्टो पेपर मिल में आरडीएफ के प्रोसेसिंग हेतु स्थापित ट्रॉमल प्लांट को सील किया गया एवं मै0 गैलेक्सी पेपर तथा मै0 कृष्णांचल पेपर को निरीक्षण में वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित न होने के कारण आरडीएफ ब्वायलरों को सील कर आरडीएफ के उपयोग को निषिद्ध किया गया।
जानकारों की मानें तो जिस कार्य को जनपद में बवंडर मचने के बाद किया गया है, यदि उसे पहले ही कर दिया गया होता तो मुजफ्फरनगर को प्रदूषण की आग में नहीं झुलसना पडता और न ही इस मुद्दे पर आमजन, किसान, पुलिस प्रशासन सहित अन्य समाजसेवी संगठनों को उद्योगपतियों के उलझना नहीं पड़ता। अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बड़ी निकटता से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि विगत कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कुछ उद्योगपतियों से मिलीभगत करके मोटी कमाई कर रहे थे, जिसके चलते कुछ उद्योगपति मोटी कमाई करने के लालच में निषिद्ध कचरे को सस्ते में खरीद कर ईंधन के रूप में प्रयोग कर रहे थे, जिसकी जानकारी होने के बावजूद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आंख व कान बंद करके बैठे रहे और मुजफ्फरनगर में बवाल हो गया।
बता दें कि जनपद में आरडीएफ ईंधन के रूप मे उपयोग एवं परिवहन किये जाने के सम्बन्ध में आ रही शिकायतों पर प्रभावी रूप से कार्यवाही किये जाने हेतु जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा 22 दिसम्बर 2025 को टीम का गठन किया गया था।

