हवलेश कुमार पटेल, मुजफ्फरनगर। इसे लापरवाही कहें या जनपद में प्रदूषण को पोषित करने वाले लोगों से मिलीभगत। जनपद में प्रदूषण पर नकेल कसने की जिम्मेदारी उठाने वाले विभाग के अफसरों ने जनपद को न केवल प्रदूषण की गहरी खाई मे धकेलने का काम कर दिया, बल्कि जनपद को आंदोलनों की आग में झोकने की राह भी खोल दी।
बता दें कि जनपद को एनसीआर में शामिल होने के कारण यहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष प्रयास किये जाने चाहिए थे, लेकिन इसके जिम्मेदार अफसरों ने न केवल इस क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य को ही गिरवी रख दिया, बल्कि जनपद को आंदोलनों की भट्टी में ही झोक दिया। विगत दिनों हुए आक्रामक आंदोलनों के चलते जहां एसएसपी कार्यालय का घेराव किया गया और वहां हुए घटनाक्रम के चलते बहुत से लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात में मुकदमें भी दर्ज हुए। अब देखना होगा कि जनपद के प्रदूषण पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी सम्भालने वाला विभाग आगे भी अपनी जिम्मेदारी सही से निभा पाता है या नहीं, या फिर लोगों के स्वास्थ्य, भाईचारे की बली यूं ही लेता रहेगा।
इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि उद्योग किसी भी क्षेत्र के विकास का पैमाना होते हैं, इससे रोजगार स्रजित होते हैं और लोगों की रोजी-रोटी का इंतजाम होता है, लेकिन जब मिलीभगत लोगों के जीवन पर ही भारी पड़ने लगे तो ये सब बेमानी हो जाता है। और सम्बन्धित विभाग की जिम्मेदारी होती है कि इस सम्बन्ध में प्रकट मानकों को कड़ाई से लागू कराया जाये। इस मामले में शिक्षा वाहिनी ने अपनी पड़ताल शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में इसकी परत दर परत जानकारी जुटाने के लिए जिम्मेदार लोगों से सम्पर्क अभियान चलायेगा।