राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर जिला व्यापार मण्डल ने किया स्वामी विवेकानंद का स्मरण

गौरव सिंघल, सहारनपुर। विवेकनंद की जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल के प्रमुख पदाधिकारियों की विशेष बैठक में व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन एवं जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद आज भी देश के युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं और भारत जब ब्रिटेन सरकार के अधीन था तब ‘उठो, जागो और तब तक नहीं रूको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये’ जैसा संदेश देकर भारतीयों को जगाने वाले महापुरूष जिन्होंने भारतीय ज्ञान व आध्यात्म का डंका सारी दुनिया में बजाया ऐसे महापुरूष स्वामी विवेकानंद को कौन नहीं जानता? उनकी लोकप्रियता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि स्वामी जी देश के 60 प्रतिशत से अधिक शिक्षित युवाओं के आज भी आदर्श है। शीतल टण्डन ने कहा कि स्वामी जी द्वारा दिया गया एक-एक व्याख्यान अनुकरणीय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा था कि विश्व की समस्त शक्तियां हमारी हैं। हमने अपने हाथ अपनी आंखों पर रख लिये हैं और चिल्लाते हैं कि सब ओर अंधेरा है। अपने हाथ अलग करो तुम्हे प्रकाश दिखाई देगा। अपने आप में विश्वास रखो व आपका आदर्श ही आपका सबसे बड़ा सहायक है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सदा गरीबों की भलाई व सेवा में जुटे रहे तथा पूरे विश्व में उन्होंने आध्यात्म भारतीय सनातन धर्म और योग पर अनेक संदेश दिये उन्होंने कई पुस्तकों की रचना भी की जिनमें राजयोग, कर्मयोग, ज्ञान योग एवं भक्ति योग प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नारियों की दशा में सुधार के लिए उन्होंने अनेक कार्य किये। स्वामी जी 1901,1902 में जब कलकत्ता में प्लेग फैला तो उन्होंने रोगियों की खूब सेवा की और सेवा के दौरान अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रखा और इसके कारण उनका स्वास्थ्य गिरता चला गया और अन्ततः 4 जौलाई 1902 को मात्रा 39 वर्ष की आयु में उनका देहान्त हो गया। उन्होंने कहा कि मानवता के मसीहा ने मानव की सेवा के लिए अपने जीवन की आहूति दे दी।उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा स्वामी जी के जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

शीतल टण्डन ने कहा कि आयु में कम किन्तु ज्ञान में असीम थे विवेकानंद। राष्ट्र निर्माण को जीवन का उद्देश्य मानने वाले स्वामी जी ने सदैव देश के गौरव और स्वामिभान को प्राथमिकता में रखा। उन्होंने देश को वैचारिक क्रान्ति का मार्ग दिखाकर धर्म की ताकत को समझाया, एकता का मूल मंत्र, महिला शिक्षा के महत्व को समझाने के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना के सृजक, धैर्य की प्रतिमूर्ति व जागृत भारत के प्रखर वक्ता थे। शीतल टण्डन ने कहा कि स्वामी जी का दर्शन एवं उनका जीवन तथा उनके कार्यों में निहित उनके आदर्श भारतीय युवकों के लिए प्रेरणा का एक विशाल स्रोत है और उनके द्वारा दिये गये नारे जब तक मंजिल न मिल जाये डटे रहो, संस्कृति वस्त्रो में नहीं चरित्र में होती है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने यह भी कहा कि डर से न भागो सामना करो और दूसरो के पीछे न भागो, अपने विचारों का संचार करो। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का यह भी संदेश था कि गंगा जी हमारी मां है और मां से बड़ा कोई धैर्यवान नहीं होता। और रोटी अपने पेट में ही नहीं किसी और के पेट में भी जानी चाहिए। सिर्फ लक्ष्य पर ध्यान लगाओ। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रेरणादायक विचार हमारी समरता व समृद्धि का प्रतीक हो सकते हैं। बैठक में सभी व्यापारियों ने माघ मेला,पर्व लोहडी व मकरसंक्रान्ति की भी शुभकामनाएं दी। व्यापारी प्रतिनिधियों ने आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री व जय जवान जय किसान का नारा देने वाले भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि के अवसर पर भी उनका भावपूर्ण स्मरण किया। 
बैठक में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन, जिला महामंत्री रमेश अरोडा,जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिडढा, मेजर एस.के.सूरी, रमेश डावर, पवन कुमार गोयल, संदीप सिंघल, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, बलदेव राज खुंगर, संजय महेश्वरी,अभिषेक भाटिया, संजीव सचदेवा, मुरली खन्ना, अरविन्द शाह आदि व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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