गौरव सिंघल, सहारनपुर। गौमाता के सम्मान और सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु वर्षों से निरंतर समर्पित सेवा आज समाज के सामने एक जीवंत प्रेरणा बनकर उभरी। सहारनपुर स्थित सनातन संस्कृत विद्यालय में आयोजित गौसेवा जागरण कार्यक्रम में श्री गुरु ब्रह्मानंद गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित गौशाला पत्रिका का भव्य प्रचार किया गया। यह संपूर्ण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक व समर्पित गौसेवक श्री हिमांशु भारद्वाज की निरंतर साधना, त्याग और सेवा का परिणाम है, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के गौशाला निर्माण और गौसंरक्षण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। उनकी वर्षों की निःस्वार्थ सेवा आज समाज और विशेषकर युवाओं के लिए दिशा और प्रेरणा बन रही।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य घनश्याम ने गौमाता को सनातन संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि गौसेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प है। आज के युवा यदि गौमाता के संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं, तो यह भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने हाथों में गौशाला पत्रिका लेकर जिस जोश और आत्मविश्वास के साथ प्रचार किया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि सनातन चेतना आज की पीढ़ी में और अधिक प्रखर हो रही है। युवाओं ने खुले शब्दों में कहा हमने गौसेवा को किताबों में नहीं, ज़मीन पर होते देखा है। यही कारण है कि हम इस अभियान से जुड़े हैं। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गौक्रांति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष सिद्ध हुआ। सनातन संस्कृत विद्यालय की भूमि पर उठी यह चेतना आने वाले समय में समाज को गौमाता, धर्म और राष्ट्र के प्रति और अधिक जागरूक करेगी। श्री गुरु ब्रह्मानंद गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान यह सिद्ध करता है कि जब नेतृत्व सेवा से निकलता है, तब वह पीढ़ियाँ खड़ी करता है।
