गुरमीत राम रहीम को जनवरी 2026 में 40 दिन की पैरोल मिली

शि.वा.ब्यूरो, रोहतक/सिरसा। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को हरियाणा सरकार ने जनवरी 2026 में 40 दिन की पैरोल मंजूर की है। इसके साथ ही यह उनकी अब तक लगभग 15वीं बार पैरोल या फरलो के रूप में मिली अस्थायी रिहाई मानी जा रही है। इससे पहले भी विभिन्न अवसरों पर उन्हें जेल नियमों के तहत बार-बार बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। राम रहीम वर्ष 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। उन्हें दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई गई है। इसके बावजूद बीते वर्षों में उन्हें कई बार पैरोल और फरलो दी जा चुकी है, जिसको लेकर हर बार राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होती रही है। 

जनवरी 2026 में जारी पैरोल आदेश के अनुसार, यह रिहाई पारिवारिक और मानवीय कारणों के आधार पर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैरोल का दायरा केवल निजी कारणों तक सीमित रहेगा और इस दौरान किसी भी प्रकार की सार्वजनिक या राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। पैरोल की अवधि में राम रहीम को सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने, समर्थकों की भीड़ जुटाने या किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने से रोका गया है। उनकी गतिविधियों पर प्रशासन की नजर रहेगी और शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पैरोल तत्काल निरस्त की जा सकती है। पुलिस और जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि राम रहीम को अब तक मिली पैरोल और फरलो की संख्या को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी 2026 की यह पैरोल मिलाकर उन्हें करीब 15 बार जेल से बाहर आने का अवसर मिल चुका है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इतने गंभीर अपराधों में सजा काट रहे दोषी को बार-बार अस्थायी रिहाई दिया जाना न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। भारत में पैरोल की व्यवस्था राज्य सरकारों के जेल नियमों और जेल मैनुअल के तहत संचालित होती है। 
कानूनी जानकारों के मुताबिक पैरोल कोई अधिकार नहीं बल्कि प्रशासनिक सुविधा है, जो मानवीय आधारों पर दी जाती है। जेल नियमों में बीमारी, मृत्यु, विवाह और अन्य पारिवारिक कारणों को पैरोल के मान्य आधार के रूप में शामिल किया गया है। विवाह या पारिवारिक कारणों पर पैरोल मिलना नियमों के अनुरूप माना जाता है, लेकिन देशभर में किस आधार पर सबसे अधिक पैरोल दी जाती है, इस संबंध में कोई एकीकृत सार्वजनिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जनवरी 2026 में 40 दिन की पैरोल के साथ एक बार फिर राम रहीम की रिहाई सुर्खियों में है। जहां सरकार इसे नियमों के तहत लिया गया प्रशासनिक निर्णय बता रही है, वहीं उनकी अब तक करीब 15 बार हुई अस्थायी रिहाइयों ने एक बार फिर पैरोल नीति और उसकी पारदर्शिता पर बहस को तेज कर दिया है।

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