शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग द्वारा भारतीय काव्यशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में के अंतर्गत एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के आचार्य व्याख्यान एवं प्रशिक्षण देंगे। कार्यशाला में भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक काव्य-सौंदर्य दृष्टि तक के विभिन्न विषयों पर गहन विमर्श होगा।
बता दें कि यह कार्यशाला न केवल संस्कृत के छात्रों के लिए, बल्कि सौंदर्यशास्त्र में रुचि रखने वाले वैश्विक जिज्ञासुओं के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगी। विद्वानों के व्याख्यान प्रतिभागियों की शोध-दृष्टि को विकसित करने और भारतीय काव्यशास्त्र की सार्वभौमिकता को पुनः स्थापित करने में सहायक होंगे। कार्यशाला में भाग लेने के लिए 15 जनवरी तक https://forms.gle/5Re7rhL9ngdYnskf पंजीकरण किया जा सकता है। कार्यशाला प्रत्यक्ष एवं आभासी दोनों माध्यमों से दोपहर 2 से सायं 5.30 बजे तक संचालित होगी, जिसमें प्रत्यक्ष रूप में 20 और आभासी रूप में 40 लोग सहभागी हो सकते हैं। कार्यशाला में भाग लेने के लिए सभी के लिए पूर्व-पंजीकरण अनिवार्य है। कार्यशाला के किसी भी निर्धारित विषय पर न्यूनतम 10 पृष्ठों का शोध-आलेख 15 जनवरी तक ईमेल द्वारा प्रेषित करना अनिवार्य है। चयनित शोध-पत्रों को ISBN के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
कार्यशाला की मार्गदर्शक समिति में संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रिपु सूदन सिंह, डॉ. बिपिन कुमार झा, डॉ. दीपका दीक्षित, डॉ. रमेशचन्द्र नैलवाल सहित
डॉ. आनंद त्रिपाठी, अमित वर्मा, निधि, पूजा, प्रियांशी, विश्वेश्वर आदि शामिल हैं।