डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
दो हजार सन तेइस आया।
बर्फीली वायु को लाया ।।1
हाड़ मांस सब कांप रहे हैं।
ग्वाल बाल सब ताप रहे हैं।।2
सूरज लगता चंदा नाईं।
धूप चांदनी ठंड समाई।।3
चना धना अरु गेहूं राई।
अलसी मैथी रबी सुहाई।।4
सरसों फूल रही मतवाली।
खड़ा रायड़ा धाक निराली।।5
बच्चे भी अब टीका पाते।
जीवन खुशियां मंगल गाते।।6
नाचोगाओ खुशी मनाओ।
नवाचार के दीप जलाओ।।7
जनवरी तेइस लगे सुहाई।
ठंडा मौसम ओढ़ रजाई।।8
प्हाड़ो पे तो बर्फ जमाती।
ऐसा जाड़ा देह कंपाती।।9
अमरीका तूफान रिसाना।
बर्फो का तो बना बिछोना।।10
दादा दादी नाना नानी।
ओढें कंबल कहें कहानी।।11
कोइ अलाव जलाता भाई।
पावे गरमी सेक लगाई।।12
अंडों के भी ठेले लगते।
गाजरहलुआ पोहा दिखते।।13
गरम जलेबी दूध मलाई।
खेलो कूदो छोड़ रजाई।।14
हरिया चटनी लहसुन खाना।
खून गरम कर ठंड भगाना।।15
गाजर पालक गोभी खाओ।
तिल की पपड़ी भोग लगाओ।।16
सेव पपीता अमरुद केला।
आ गये बैर छोड़ करेला।।17
प्रातः उठके दौड़ लगाओ।
योगा करके स्वाथ्य बनाओ।।18
काक चेष्टा बगुला ध्याई।
प्रात:उठ के करो पढाई।।19
सादा भोजन सेहत पाई।।
आलस त्याग परीक्षा आई।।20
नया साल सुख संपद लावे।
विद्या बुद्धि कीरति पावे।।21
गये साल कोरोना आया।
भू मंडल पर दुखड़ा छाया।।22
देशी काड़ा जग को भाया।
सेनीटाई मास्क लगाया।।23
तीजी लहर बनी दुखदाई।
सर्दी खांसी जग में छाई।।24
दो गज दूरी मास्क लगाना।
साफ सफाई तुम अपनाना।।25
बाइस बिदा अब तेइस आई।
देख परीक्षा करो पढाई।।26
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश
