स्वतंत्रता सेनानी जुगल किशोर का नाम संसद में गूंजा

गौरव सिंघल, सहारनपुर। जिले के भुला दिए गए स्वतंत्रता सेनानी और मुख्यमंत्री डा. संपूर्णानंद एवं मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता के मंत्रिमंडल में कई बार सफल और लोकप्रिय मंत्री रहे जुगल किशोर सिंघल का नाम आज राज्यसभा में गूंजा। जुगल किशोर सिंघल को 1930 में ब्रिटिश सरकार ने जेल में डाल दिया था। एक साल बाद गांधी ईरविन समझौते के बाद उनकी रिहाई हुई थी। 1933 में उन्हें और उनकी पत्नी दोनों को ब्रिटिश सरकार ने जेल में डाल दिया था। 1940 में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। भारत छोड़ों आंदोलन में वह दिल्ली के लालकिले और लखनऊ की सेंट्रल जेल में बंद रहे। 1945 में जुगल किशोर उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। 1954 में उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री डा. संपूर्णानंद के मंत्रिमंडल में वह श्रम और समाज कल्याण मंत्री रहे। उसके बाद चंद्रभानू गुप्ता के मुख्यमंत्रित्व में बनी सरकार में वह शिक्षा मंत्री रहे। 1970 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन से अवकाश ग्रहण कर लिया था। ध्यान रहे आचार्य जुगल किशोर का जन्म 1893 में सहारनपुर जिले के पठेड़ गांव में हुआ था। उनकी शिक्षा कोलकतानैनीताल और सहारनपुर में हुई थी। शीर्ष कांग्रेस महिला नेत्री एनीबेसन्ट ने 1913 में उन्हें उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए लंदन की ओक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भेजा था। 

ध्यान रहे राज्य सभा की सदस्य गीता उर्फ चंद्रप्रभा ने राज्य सभा में उत्तर प्रदेश की गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में सवाल उठाया था। जिसके जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के तीस जिलों के 196 ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं जो गुमनाम हैं जिन्हें स्वतंत्रता के बाद अपने ही देश में भुला दिया गया। आगरा समेत उत्तर प्रदेश में ऐसे 196 गुमनायक की पहचान कर उनकी सूची जारी की गई है। उन्हीं में सहारनपुर के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी जुगल किशोर सिंघल का नाम भी शामिल है।

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