खुश रहो मस्त रहो

यशपाल परिहार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
इस जीवन की चादर में
सांसों के ताने बाने हैं
दुख की थोड़ी सी सलवट है
सुख के कुछ फुल सुहाने हैं
क्यों सोचे आगे क्या होगा
अब कल के कौन ठिकाने हैं।।
ऊपर बेठा वह बाजीगर
जाने क्या मन में ठाने हैं
चाहे जितना भी जतन करें
भरने का दामन तारों से
झोली में वह भी आएगी
जो तेरे नाम के दाने हैं
कक्षा 11 (विज्ञान संकाय) दरबार कोठी, आगर (मालवा) मध्यप्रदेश

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