गौरव सिंघल, देवबंद। विख्यात सिद्धपीठ श्री मंकेश्वर महादेव मंदिर मानकी पर आयोजित शिवमहापुराण कथा के पांचवे दिन कथाव्यास मनोज जी महाराज ने कहा कि त्रिपुरारि की जय बोलने से सभी का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म देवताओं की प्रार्थना पर हुआ था। उनका एक नाम स्कंद भी है। 6 कृतिकाओं ने उनका पालन किया, इसलिए उन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है। तारकासुर नाम का राक्षस बहुत शक्तिशाली हो गया था। उसे वरदान था कि वो सिर्फ शिव-पार्वती के पुत्र के हाथों ही मरेगा। देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया और देवसेना के सेनापति बने। त्रिपुरारी भगवान शिव का नाम है। उन्होंने तीन असुरों के तीन नगर - त्रिपुर - को एक बाण से नष्ट किया था। कार्तिकेय उन्हीं त्रिपुरारी के पुत्र हैं। त्रिपुरारी की जय बोलने का मतलब है -शिव पुत्र कार्तिकेय की जय बोलना।
आज की कथा के यजमान संदीप गुप्ता सीए एवं सचिन शर्मा अध्यक्ष खाटू श्याम मंदिर रहे। आरती के यजमान बसंत कुमार व दीपक कुमार रहे। प्रसाद वितरण सुरेश तायल लोहे वाले एवं नवीन गोयल सर्राफ की ओर से किया गया। कथा में चौधरी परविंदर, विजय सिंघल, चौधरी नरेश,गुड्डू त्यागी, राजेश सिंघल, मोनी जैन, रितेश बंसल एडवोकेट, उमा देवी पूर्व ब्लाक अध्यक्ष, अंजू गोयल, मंजू शर्मा सभासद समेत काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा का रसपान किया। संचालन सुधीर गर्ग ने किया।

