शि.वा.ब्यूरो, मेरठ। विद्यालयी बच्चों की सुरक्षित, संरक्षित एवं मानकानुसार परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मिशन सेफ फ्यूचर के तहत विद्यालयी वाहनों हेतु जनपद में मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के अंतर्गत विद्यालयी वाहनों हेतु विशेष अभियान परिवहन 11 से 25 अगस्त तक आयोजित किया जायेगा।
एआरटीओ प्रशासन विकाश कुमार यादव ने बताया कि विद्यालयी बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार एवं परिवहन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में विद्यालयी वाहनों से संबंधित दुर्घटनाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि अनेक दुर्घटनाएं वाहन चालकों की लापरवाही, विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रभावी निगरानी के अभाव, जर्जर एवं अनफिट वाहनों के संचालन तथा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन में कमी के कारण हुई हैं। उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों के दृष्टिगत जनपद में व्यापक स्तर पर निरीक्षण, सत्यापन एवं प्रवर्तन कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि विशेष अभियान के दौरान जनपद के समस्त सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड, बेसिक शिक्षा परिषद, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों द्वारा संचालित अथवा अनुबंधित स्कूल बसों, वैन एवं अन्य विद्यालयी वाहनों का गहन निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि साथ ही ऐसे विद्यालयों का भी सत्यापन किया जाएगा, जो निजी अथवा अनुबंधित वाहनों के माध्यम से विद्यार्थियों का परिवहन करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान प्रत्येक विद्यालयी वाहन के वैध पंजीयन, फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र, कर अदायगी, चालक के वैध ड्राइविंग लाइसेंस, प्राथमिक उपचार पेटी, अग्निशमन यंत्र, स्पीड गवर्नर, जीपीएस, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, आपातकालीन निकास, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप तथा केंद्रीय मोटरयान नियमावली एवं विद्यालयी वाहन सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का परीक्षण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में विद्यालयी वाहन पंजीकृत नहीं हैं, किन्तु निजी अथवा अनुबंधित वाहनों द्वारा विद्यार्थियों का परिवहन कराया जा रहा है, उनकी पृथक सूची तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में गंभीर अनियमितताएं अथवा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनकी रेड लिस्ट तैयार करके जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान विद्यालय प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं नेत्र परीक्षण कराया गया हो। छोटे बच्चों के परिवहन हेतु प्रत्येक विद्यालयी वाहन में एक प्रशिक्षित महिला अथवा पुरुष सहायक की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन वाहनों को पूर्व में नोटिस दिए जाने के बावजूद फिटनेस नहीं कराई गई है अथवा सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर नहीं किया गया है, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ प्रशासन विकाश यादव ने जनपद के समस्त विद्यालय प्रबंधकों, वाहन स्वामियों, चालकों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे विद्यालयी बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केवल पूर्णतः फिट एवं मानकानुसार विद्यालयी वाहनों का ही संचालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा सुरक्षा मानकों की अवहेलना पाए जाने पर नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा सुरक्षित विद्यालयी परिवहन ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।
