सिद्धपीठ श्री मन्केश्वर महादेव मंदिर में श्री शिवमहापुराण का दूसरा दिन, शिव-सती संवाद सुनाकर श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

गौरव सिंघल, देवबंद। सिद्धपीठ श्री मन्केश्वर महादेव मंदिर के कथा हॉल में आज दूसरे दिन आयोजित श्री शिवमहापुराण की कथा सुनाते हुए कथा वाचक मनोज शास्त्री जी महाराज ने शिव-सती संवाद के बारे में विस्तार से बताया। कथा का शुभारंभ भगवान शिव और माता सती के दिव्य संवाद से हुआ। इस प्रसंग में महाराज जी द्वारा आदर्श दाम्पत्य, विश्वास और धर्म के महत्व का सुंदर वर्णन किया गया। कथा में महर्षि अगस्त्य की महान तपस्या और उनके अद्भुत योगदान का वर्णन हुआ। श्रद्धालुओं ने उनके ज्ञान और भक्ति से प्रेरणा ग्रहण की। महर्षि अगस्त्य और भगवान शिव के बीच हुए दिव्य संवाद में धर्म, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग बताया गया, जिससे उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो गए।

कुंभज आश्रम में भगवान श्रीराम की कथा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया। भक्तों को कथा से मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन का संदेश मिला। दक्षिणा प्रकरण कथा में दक्षिणा के महत्व और दान की पवित्र भावना का वर्णन किया गया। बताया गया कि श्रद्धा से किया गया दान ही श्रेष्ठ होता है। भगवान शिव के कैलाश प्रस्थान और श्रीराम दर्शन का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति और विनम्रता का संदेश ग्रहण किया। महाराज जी द्वारा
माता सती के मोह और उसके परिणामों का वर्णन किया गया एवं विवेक और संयम का महत्व समझाया गया। इसी के साथ सती और सखी में भेद इस प्रसंग में सच्चे संबंधों और विवेकपूर्ण निर्णय का महत्व बताया गया। भक्तों ने जीवन में सही संगति रखने का संदेश प्राप्त किया।
देवताओं द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा माता सती के त्याग का अत्यंत मार्मिक वर्णन महाराज जी द्वारा किया गया। भगवान शिव की गहन समाधि और उनके योग स्वरूप का वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने ध्यान और आत्मशांति का महत्व जाना। पति–पत्नी का महत्व कथा में पति-पत्नी के पवित्र संबंध, विश्वास और परस्पर सम्मान का संदेश दिया गया। परिवार में प्रेम और समर्पण की प्रेरणा मिली। भगवान शिव के समाधि से जागरण का प्रसंग सुनाया गया। कथा में लोककल्याण हेतु शिव की करुणा का वर्णन हुआ। दक्ष यज्ञ एवं राजा दक्ष के यज्ञ और माता सती के हठ का वर्णन किया गया। इस प्रसंग से अहंकार और क्रोध के दुष्परिणाम महाराज द्वारा समझाए गए। साथ ही जिज्ञासा का महत्व ज्ञान प्राप्ति के लिए जिज्ञासा को आवश्यक बताया गया। कथा ने सत्संग और प्रश्न पूछने की प्रेरणा दी। महाराज जी द्वारा माँ के प्यार, त्याग और ममता का भावपूर्ण वर्णन किया गया। जिससे श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं।
कथा में बताया गया कि केवल सत्य बोलना ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की भावना भी पवित्र होनी चाहिए। माता सती के देह त्याग का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। पूरा पंडाल शिव नाम के जयघोष से गूंज उठा। 
भगवान शिव के क्रोध और दक्ष यज्ञ के विध्वंस का वर्णन किया गया। कथा ने अहंकार त्यागने का संदेश दिया। 51 शक्तिपीठों की महिमा का वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने शक्तिपीठों के महत्व को जाना। उज्जैन के महाकालेश्वर की दिव्य महिमा और शिव की अनंत कृपा का वर्णन किया गया। भक्तों ने हर-हर महादेव के जयघोष लगाएं। भगवान शिव की भस्म की महिमा का वर्णन किया गया तथा भव्य आरती के साथ श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इसके बाद माता पार्वती के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक आयोजन किया गया। मंगल गीत, बधाई और भक्ति से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। आज के यजमान सुभाष त्यागी एवं अनिल कुमार रहे। मुख्य आरती यजमान आशीष कुमार एवं डॉ. योगेश लोहारिया रहे। प्रसाद वितरण पवन कुमार द्वारा किया गया।

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