गौरव सिंघल, सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर भूमि पर बनी एक पुरानी मस्जिद को सुनवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने फैसला दिया कि जिस भूमि पर यह मस्जिद बनी हुई है वह राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है। नगर मजिस्ट्रेट ने इस बाबत फैसला दिया कि मस्जिद के प्रबंधक एक माह के भीतर इस अवैध ढांचे को खुद हटा लें, वरना प्रशासन उसका ध्वस्तीकरण कराएगा, जिसका व्यय भी मस्जिद प्रबंधकों को देना होगा। सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में प्रबंधकों पर 6 करोड़ 31 लाख रूपए क्षतिपूर्ति के रूप में जमा कराने का आदेश दिया है। मस्जिद के मुतव्वली तनवीर अहमद और उनके वकील परवेज जब्बार ने आज कहा कि वे सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इन लोगों का यह भी दावा है कि यह मस्जिद ब्रिटिशकालीन है और उनके पास 1911 का बिजली का बिल भी साक्ष्य के रूप में है।
बता दें कि पूर्व जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस मस्जिद के बाबत में एक हिंदू संगठन की शिकायत मिलने के बाद गहराई से जांच पड़ताल कराई थी और पाया था कि यह मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी हुई है, जिसका पूरा विवरण राजस्व विभाग के दस्तावेजों में दर्ज है। उन्हीं के समय में 16 अप्रैल 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में वाद दायर किया गया था कि खसरा नंबर 539, पठानपुरा कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में अवैध कब्जाकर मस्जिद निर्माण कराई गई है।