मोक्षायतन योगाश्रम में व्यास पूर्णिमा पर होगा युवाओं का यज्ञोपवीत संस्कार

गौरव सिंघल, सहारनपुर। गुरुपूर्णिमा पर्व की तैयारी कर रहे शिष्यों से संवाद करते हुए योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण बोले व्यासपूर्णिमा गुरु से बंधने का नहीं साधना से जुड़ने का पर्व है, गुरु बाँधते नहीं, संस्कारों की मर्यादा दे कर अज्ञानजनित पीड़ाओं से मुक्त करते हैं। उन्होंने साधकों से मनन करने का स्वभाव विकसित करने का आवाहन करते हुए कहा कि मनन पूर्वक जीने की विशेषता के कारण ही हम मनुष्य कहलाते हैं। यज्ञोपवीत मर्यादा और ब्रह्मचर्य शक्ति की तुलना नदी से करते हुए उन्होंने कहा कि नदी के दोनों छोर उसकी मर्यादा है जिनमें निरंतर बहते हुए वह अपना स्वरूप नहीं खोती और मानवता को जीवन ऊर्जा देती है लेकिन दो छोर की मर्यादा टूटते ही वही जल महाविनाश की वजह बन जाता है। मर्यादा विहीन युवा शक्ति भी ऐसे ही विध्वंसक हो सकती है। अपने युवाओं की इस शक्ति को मर्यादा देने के लिए ही ऋषियों ने यज्ञोपवीत संस्कार की व्यवस्था दी है।

मोक्षायतन योग साधक संघ के अधिष्ठाता एन के शर्मा ने बताया कि निरंतर चलने वाली श्रृंखला में सबसे पहले १९७३ में गुरुदेव ने यज्ञोपवीत दीक्षा की शुरुआत की थी, इसी श्रृंखला में व्यास पूर्णिमा 29 जुलाई पर मोक्षायतन योग संस्थान में नई पीढ़ी के साधकों का यज्ञोपवीत संस्कार हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का संस्कारों से विहीन रह जाना चिंता का विषय है। इसलिए 12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को गुरुदेव स्वामी भारत भूषण जी के पावन सान्निध्य में यज्ञोपवीत संस्कार कराने का अवसर दिया जा रहा है।

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