सुरेंद्र सिंघल/ गौरव सिंघल, सहारनपुर। कलेक्ट्रेट के बारे में सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के फैसले ने इस मस्जिद को विवादित बना दिया है। बजरंग दल द्वारा उठाए गए इस मामले को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने लपक लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा सांप्रदायिक ध्रुर्वीकरण का कारण बन सकता है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आज कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट इस मामले को सुनने की अहरता नहीं रखते हैं क्योंकि यह प्रशासनिक नहीं न्यायिक विषय है। भूस्वामित्व के मामले को न्यायिक अदालतों में ही सुना जा सकता है। इस मस्जिद के मुतवल्ली यानि के प्रबंधक तनवीर अहमद एडवोकेट ने कहा कि आदेश मिलते ही वे डिस्ट्रिक जज की अदालत में याचिका दाखिल करेंगे।
बता दें कि दो दिन पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया था कि 1359 फसली के राजस्व अभिलेखों के आधार पर मस्जिद पर बनी भूमि को कलेक्ट्रेट की सरकारी जमीन माना। उन्होंने मस्जिद को बेदखल करने के साथ-साथ बतौर क्षतिपूर्ति 6.41 करोड़ रूपए का जुर्माना भी लगाया है। सांसद इमरान मसूद कहते हैं कि कलेक्ट्रेट की पूरी भूमि को गांव पठानपुरा निवासी वाहिद खां और याकूब खां ने वक्फ को दिया था और उस भूमि पर ही कलेक्ट्रेट भवन आदि बने। यह भूमि खेवट संख्या 10/1 वाहिद खां और याकूब खां की थी। इस जमीन पर बनी मस्जिद के पास 1 जनवरी 1911 का बिजली का बिल मौजूद है। मस्जिद की ऊपरी मंजिल पर 1960 से डाकघर चल रहा है जिसका रजिस्टर्ड एग्रीमेंट है। हांलाकि जिला प्रशासन ने इस मस्जिद में बाहरी लोगों के नमाज पढ़ने पर प्रशासनिक रोक लगाई हुई है। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उनके सहयोगी सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने शुक्रवार को इस मस्जिद में जुमे की नमाज अदाकर प्रशासनिक निर्देशों का खुला उल्लंघन किया। इमरान मसूद ने दो बातें कही। एक तो वे संविधान के दायरे में रहकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और कहा कि सत्तारूढ़ दल ऐसे मामले उठाकर सांप्रदायिकता और घृणा फैलाने के काम कर रहा है। इससे सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने का खतरा पैदा होता है। देवबंद के बास्तम गांव निवासी बजरंग दल के नेता विकास त्यागी ने वर्ष 2025 में तत्कालीन जिलाधिकारी (वर्तमान में आगरा) मनीष बंसल से शिकायत की थी कि कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद अवैध है और यह सरकारी भूमि पर बनी हुई है। मनीष बंसल ने जांच पड़ताल कराने के बाद मामले को सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में रैफर कर दिया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाया था। अभी इस मुद्दे को भाजपा और संघ ने इसे मुद्दा नहीं बनाया है। लेकिन इमरान मसूद जरूर इसमें कूद गए हैं।
