अब न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग बन चुके हैं मध्यस्थता और समझौता

केसी जैन, आगरा। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता और समझौता अब न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग बन चुके हैं। उन्होंने कहा किकृ ये केवल अदालती प्रक्रिया के विकल्प नहीं, बल्कि आधुनिक न्याय प्रणाली की नींव हैं। उन्होंने एक गंभीर कमी की ओर ध्यान दिलाया कि मध्यस्थों (।तइपजतंजवते) के दुराचार की शिकायत के लिए कोई स्वतंत्र मंच नहीं है, और अदालतें उन्हें हटाने से कतराती हैं क्योंकि अधिकतर मध्यस्थ पूर्व न्यायाधीश होते हैं।

बता दें कि भारत में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। ऐसे में यदि मध्यस्थता और सुलह प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा नहीं रहा, तो न्याय और भी दूर होगा। वैश्विक निवेश आकर्षित करने और व्यावसायिक विवादों को शीघ्र सुलझाने के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और स्वतंत्र मध्यस्थता तंत्र आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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