गौरव सिंघल, सहारनपुर। देश से दुनिया तक योग की अलख जगाने वाले योग गुरु स्वामी भारत भूषण इसे योगिराज बाबा सोमनाथ और योगेश्वर श्रीकृष्ण का अपने सिर पर आशीर्वाद का हाथ मानते हैं कि उन्हें योगीराज शिव के धाम हिमालय स्थित मानसरोवर यात्रियों, ऋषिकेश में वैश्विक योग जिज्ञासुओं, काशी धाम के साथ ही उनके सोमनाथ धाम के प्रांगण में योगामृत छलकाने के साथ ही योगेश्वर श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा कर्मस्थली वृंदावन, कुरुक्षेत्र हरियाणा, इंद्रप्रस्थ, भालका तीर्थ, द्वारिका और उनके दिव्यलोक गमन स्थल प्रभास में योग की सेवा करने का सौभाग्य मिला।
आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर योगगुरु बोले कि मुझे गुजरात के वेरावल में हुए भारत योग शिविर के समय सोमनाथ धाम में मस्तक नवाने का सुयोग हुआ तो मन में ऐसा भाव आया कि बाबा सोमनाथ अपने आंगन में ही योगधारा बहाने का सुयोग बनाएं। फिर क्या था बाबा सोमनाथ ने ऐसी रचना रची कि भारत सरकार ने सोमनाथ प्रांगण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के नेतृत्व की जिम्मेदारी दे दी और बाबा सोमनाथ ने योग सेवा का बुलावा भेज दिया।
स्वामी भारत भूषण ने कहा कि ये भगवान सोमनाथ का अनूठा आशीर्वाद था कि मेरी छह दशकों से चल रही देश-विदेश की शिविर श्रृंखला में पहली बार योग प्रेमियों को भारत की योग परंपरा में तीन पीढ़ियां एक साथ योग शिविर का संचालन करती दीखी, यानी मेरे संग बेटी आचार्य प्रतिष्ठा व अगली पीढ़ी की प्रतिनिधि देवी प्रत्यक्षा भी मंचासीन रहीं ! योग गुरु बोले कि आज भी इस भव्य शिविर की ऐतिहासिक तस्वीरें बाबा सोमनाथ के प्रति कृतज्ञता में आँखें छलकाती हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर आततायी हमले झेल कर भी अडिग व अटल खड़ा गरलकंठ श्री सोमनाथ धाम हमारी आध्यात्मिक धरोहर धर्मनिष्ठा व प्राचीनतम सनातन संस्कृति का साक्षी है।

