मुजफ्फरनगर में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित, 6 बजते ही शहर की बत्तियां गुल, डीएवी इंटर कॉलेज में हुआ रेस्क्यू अभ्यास

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर।  जनपद में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। आर्य समाज रोड स्थित डीएवी इंटर कॉलेज में शाम 6 बजे जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और त्वरित राहत-बचाव की तैयारियों का परीक्षण करना रहा। कार्यक्रम के अनुसार ठीक शाम 6 बजे पूरे शहर में ब्लैकआउट लागू किया गया और देखते ही देखते शहर की बत्तियां गुल हो गईं। अंधेरे के बीच सायरन, सुरक्षा टीमों की गतिविधियां और रेस्क्यू अभ्यास ने माहौल को पूरी तरह वास्तविक स्थिति जैसा बना दिया। करीब 10 मिनट तक शहर की बिजली गायब रही | डीएवी इंटर कॉलेज परिसर में प्रशासन, पुलिस, फायर सर्विस, चिकित्सा विभाग, नगर पालिका व नागरिक सुरक्षा टीमों ने मिलकर मॉक ड्रिल को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया।

मॉक ड्रिल के दौरान एक आपातकालीन स्थिति का दृश्य बनाया गया, जिसमें कॉलेज परिसर में आग लगने की सूचना पर अफरा-तफरी का माहौल दर्शाया गया। आग लगने से हड़कंप मचने की स्थिति में छात्र-छात्राओं और मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का अभ्यास कराया गया। इसी दौरान घायल होने की स्थिति का भी प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देते हुए एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भेजने की कार्रवाई कराई गई। जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा ने कहा कि आपात स्थिति में सभी नागरिकों को घबराने के बजाय संयम बनाए रखना चाहिए। खुले स्थान से दूर रहकर सुरक्षित जगह पर शरण लेनी चाहिए, मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट, घरों की बाहरी लाइटें और अनावश्यक रोशनी बंद रखनी चाहिए। कार्यक्रम में अधिकारियों ने मॉक ड्रिल के माध्यम से लोगों को बताया कि यदि कभी युद्ध जैसी स्थिति या हवाई हमला होता है, तो किस प्रकार सतर्कता बरतनी चाहिए और जान-माल की सुरक्षा कैसे की जा सकती है।

मॉक ड्रिल में एडीएम फाइनेंस गजेंद्र सिंह द्वारा रेस्क्यू अभियान को संचालित किया गया। उन्होंने विभागीय टीमों के बीच समन्वय कराते हुए सुरक्षा चक्र, घायलों की निकासी और राहत कार्यों की निगरानी की। वहीं मुख्य अग्निशमन अधिकारी सीएफओ अनुराग सिंह ने फायर ब्रिगेड की कमान संभाली और आग बुझाने के लिए फायर टेंडर, पाइप लाइन, पानी की बौछार सहित सभी संसाधनों का प्रयोग कर आग पर नियंत्रण करने का अभ्यास कराया। मॉक ड्रिल के दौरान जैसे ही सायरन बजाया गया, पूरे मैदान की लाइटें बंद कर दी गईं और ब्लैकआउट की स्थिति बना दी गई। इस दौरान लोगों को समझाया गया कि ब्लैकआउट का मुख्य उद्देश्य दुश्मन को किसी भी प्रकार की रोशनी या लोकेशन की जानकारी न मिलने देना होता है, जिससे हवाई हमले का खतरा कम किया जा सके।

मॉक ड्रिल में पुलिस प्रशासन की ओर से एसपी ट्रैफिक अतुल चौबे पुलिस फोर्स के साथ मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने क्षेत्र में ट्रैफिक नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा घेरा बनाने की व्यवस्था देखी। इसके अलावा एसडीएम सदर प्रवीण द्विवेदी, तहसीलदार सदर राधेश्याम गौड़, पशु चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता भी मॉक ड्रिल में उपस्थित रहे और विभागीय कार्यवाही का निरीक्षण किया। नगर पालिका की ओर से चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप और ईओ प्रज्ञा सिंह भी डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित मॉक ड्रिल रेस्क्यू अभियान में पहुंचीं। नगर पालिका से जुड़े संसाधनों, लाइट व्यवस्था, आपातकालीन सहायता और नागरिक सुविधाओं से संबंधित भूमिका पर भी चर्चा की गई। अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल समय-समय पर आयोजित की जाती हैं ताकि आम जनता को वास्तविक स्थिति से पहले मानसिक और व्यवहारिक रूप से तैयार किया जा सके। उन्होंने लोगों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।

नागरिक सुरक्षा व्यवस्था की ओर से चीफ वार्डन अभिषेक अग्रवाल अपनी टीम के साथ सक्रिय रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर लोगों को सुरक्षित मार्ग से निकालने, भीड़ नियंत्रण और आवश्यक निर्देशों के पालन का अभ्यास कराया। पूरे कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की टीमें लगातार सक्रिय रहीं और मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों ने हर चरण को बारीकी से देखा। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मॉक ड्रिल के दौरान सभी विभागों द्वारा किए गए संयुक्त अभ्यास की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय, राहत-बचाव, आग पर नियंत्रण, घायलों की निकासी, प्राथमिक उपचार, ट्रैफिक प्रबंधन तथा नागरिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को मजबूती देना है ताकि वास्तविक संकट के समय जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के दौरान आमजन को भी जागरूक किया गया कि ऐसी स्थिति में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, सभी लाइटें बंद रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। मॉक ड्रिल पूर्ण होने के बाद टीमों ने अभ्यास की समीक्षा की और जरूरी सुधारों को लेकर आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही हवाई हमले और आग लगने की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव प्रदर्शन किया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने सीढ़ी लगाकर एक व्यक्ति को बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकाला और उसे एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिससे आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का भी अभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम में सिविल डिफेंस, पुलिस प्रशासन, फायर ब्रिगेड तथा एनसीसी के स्वयंसेवकों ने भी भाग लिया और विभिन्न सुरक्षा उपायों का प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नगर पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप, आपदा एवं नागरिक सुरक्षा सहायक नासिर हुसैन, एसडीएम प्रवीण द्विवेदी, ईओ प्रज्ञा सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह, डॉ. शमशेर, बिजली विभाग के नोडल अधिकारी सागर बांगुरा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ इमेरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से गुलफाम अहमद, प्रवेश कुमार, विवेक गोयल आदि मौजूद रहे।


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