गौरव सिंघल, सहारनपुर। शिक्षा और राजनीति के दो भारत रत्नों का जन्म 25 दिसंबर को होने और दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रधर्म रक्षक गुरु गोविंद सिंह की माता गूजरी देवी और उनके चारों पुत्रों और अनेक सिक्ख वीरों पर हुए जुल्म और अमर बलिदानो के बावजूद खालसा पंथ और उनके हिन्दू धर्म के आज भी जीवंत अस्तित्व में होने की वजह ही आज के दिन को बड़ा दिन मनाने के लिए काफी है। मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान में इन महान विभूतियों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन के साथ अपने गौरवशाली सांस्कृतिक राष्ट्रीय धरोहर को याद करने के लिए आयोजित स्वाभिमान यज्ञ और संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि एक ओर राष्ट्रचिंतन, अध्यात्म के साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसी संस्था देने वाले भारत रत्न मदनमोहन मालवीय और संसदीय मर्यादा और चरित्र की राजनीति के पुरोधा भारतरत्न अटल बिहारी बाजपई का जन्म आज ही के दिन होने से ये सच में बड़ा दिन है।
उन्होंने कहा कि हमें स्वाभिमान के साथ विवेक की दृष्टि से तथ्यों को देखना चाहिए। आज की संगोष्ठी में वरिष्ठ साधक ललित रुहेला, सुभाष वर्मा, योगाचार्य अनीता शर्मा, योगाचार्य आलोक श्रीवास्तव, योगाचार्य अनुभव बागले, यश राणा आदि ने भी अपने विचार रखे।

