एसडी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में मूर्तिकार राम वी. सुतार के निधन पर दो मिनट का मौन रखा

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। आज एसडी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के ललित कला विभाग द्वारा विश्वविख्यात मूर्तिकार एवं पद्मभूषण से सम्मानित राम वी. सुतार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया तथा उनके कला जगत में दिए गए अतुलनीय योगदान को भावपूर्ण स्मरण किया गया। 

शोक-संदेश में डॉ. महावीर सिंह ने कहा कि राम वी. सुतार भारतीय मूर्तिकला परंपरा के ऐसे स्तंभ थे, जिनकी कृतियाँ न केवल सौंदर्यबोध की उत्कृष्ट मिसाल हैं, बल्कि राष्ट्र की चेतना और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी विश्व-स्तरीय कृति ने भारतीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्राम वी. सुतार के जीवन, साधना और अनुशासन से सीख लेकर कला को समाज-सेवा और राष्ट्र-निर्माण का माध्यम बनाएं। 

प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल ने कहा कि राम वी. सुतार का जीवन समर्पण, तपस्या और निरंतर सृजन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राम वी. सुतार ने भारतीय मूर्तिकला को आधुनिकता के साथ परंपरा से जोड़े रखा और विश्व मंच पर भारत की कला-प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। डॉ. मित्तल ने कहा कि महान कलाकारों का स्मरण केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके विचारों और मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात किया जाना चाहिए । 

राजीव पाल सिंह ने कहा कि कला शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि राम वी. सुतार की कृतियाँ विद्यार्थियों के लिए जीवंत पाठशाला हैं, जिनसे अनुपात, संरचना, भाव-प्रस्तुति और तकनीकी दक्षता की गहन समझ विकसित होती है। उन्होंने बीएफए विभाग की ओर से यह संकल्प भी व्यक्त किया कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक पाठ्यक्रम एवं गतिविधियों में राम वी. सुतार की कृतियों और उनके कला दर्शन का विशेष अध्ययन कराया जाएगा। 

कुमार वैभव ने बताया कि राम वी. सुतार का जन्म एक साधारण परिवेश में हुआ, परंतु उनकी असाधारण प्रतिभा, कठोर परिश्रम और अटूट साधना ने उन्हें विश्वविख्यात बनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राम वी. सुतार ने धातु और पत्थर में जीवन्तता भर दी। कुमार वैभव ने कहा कि राम वी. सुतार की कला केवल आकार और सौंदर्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें राष्ट्रप्रेम, मानवता और सांस्कृतिक चेतना का गहरा संदेश निहित था।

इस अवसर पर कलांगन के निदेशक डॉ. महावीर सिंह, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल व बीएफए विभागाध्यक्ष राजीव पाल सिंह, बीबीए एवं बीएफए विभाग के समस्त शिक्षक और शिक्षार्थियांे सहित दानिया अंसारी, ज्योति, अनन्या शुक्ला, प्राची गर्ग, अंजलि, सुनील कुमार और कुलदीप कुमार मोहम्मद अंजार, संजय, सोनिका, पुरवी, प्राची, दीपक गर्ग, प्रशांत गुप्ता, विनीता चैधरी, अमित, सतीश, पवन बालियान एवं लवी वर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। 

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