शि.वा.ब्यूरो, शामली। सीएमओ ने बताया कि ठंड बढ़ने के कारण रक्तचाप बढ़ता है। उन्होंने बताया कि रक्तचाप बढ़ने से ह्रदयाघात व स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि बीपी व दिल के रोग वाले बुजुर्गों को खुद रक्तचाप को नियंत्रित रखने की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ठंड का सीधा असर पड़ता है, इसलिए उन्हें खानपान का भी ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में अधिक तेल मसाले वाले खाने की जगह हल्का व पौष्टिक भोजन का सेवनकरना चाहिए। उन्होंने बताया कि हरी सब्जी, दाल व रोटी का इस्तेमाल अधिक करना लाभकारी है। उन्होंने बताया कि आहार में विटामिन सी युक्त फल, अखरोट, तुलसी और हल्दी, दूध भी शामिल करें। उन्होंने बताया कि ठंड में बुजुर्गों को जोड़ों का दर्द बहुत परेशान करता है, इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही यदि किसी को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो उन्हें अपने ब्लड प्रेशर की रीडिंग पर नियमित रूप से ध्यान रखने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर से बिना पूछे अपनी दवा में किसी प्रकार का परिवर्तन न करें।
सीएमओ ने कहा कि ठंड से केवल बुजुर्ग ही नहीं नवजात शिशु एवं छोटे-छोटे बच्चों को भी बचाने की जरूरत है, इसके लिये उनके देखभाल, खानपान का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशु का कंगारू मदर केयर तकनीक से ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चे को हमेशा सूखे बिछावन पर ही लिटाना चाहिए और बच्चे को हमेशा गर्म भोजन एवं दूध, गर्म पानी पीने के लिए देना चाहिये।
आमतौर पर ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर हाई होता है और गर्मियों में लो, क्योंकि ठंड के मौसम में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं। इसकी वजह से संकरी नसों और धमनियों तक रक्त पहुंचाने के लिए और अधिक प्रेशर की जरूरत होती है। ठंड के साथ-साथ मौसम के पैटर्न में आए अचानक बदलाव का प्रभाव भी ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। 65 साल या उससे अधिक उम्र वाले लोगों में यह समस्या आमतौर पर पाई जाती है। उक्त बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय अग्रवाल ने कही।
