सुरेंद्र सिंघल/गौरव सिंघल,शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
सहारनपुर मंडल में लोकसभा की चार महत्वपूर्ण सीटें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर और बिजनौर आती हैं। उसमें खतौली विधानसभा सीट में भाजपा की करारी हार ने विपक्ष के मनोबल को बढ़ा दिया है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कैराना और मुजफ्फरनगर सीटें जीत गई थी। लेकिन खतौली विधानसभा उपचुनाव के नतीजे ने भाजपा नेतृत्व को कई सवालों के जवाब दे दिए हैं।
पहला सवाल यह है कि जिस तरह से भाजपा नेतृत्व संगठन में जाटों को आंख मींचकर नेतृत्व प्रदान कर रहा है वह भाजपा के परंपरागत मतदाताओं और समर्थकों को स्वीकार्य नहीं है। केंद्रीय पशुधन राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान के रवैए और तौर तरीकों से दूसरी जातियों के लोग खुद को असहज और अपमानित महसूस करते हैं। भाजपा ने क्षेत्रीय अध्यक्ष भी जाट बिरादरी के मोहित बेनीवाल को बनाया हुआ है। ऊपर से जाट बिरादरी के ही भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया हुआ है।
खतौली चुनाव में वर्करी कर रहे भाजपा नेताओं ने आज बताया कि पूरे खतौली उपचुनाव में जाटों ने रालोद नेता जयंत चौधरी के इशारे पर रालोद के विजयी प्रत्याशी मदन भैय्या को वोट डालने का काम किया है और भाजपा के जाट नेताओं को जाटों ने नकार दिया है। भाजपा नेता इस भ्रम में थे कि बसपा उम्मीदवार की अनुपस्थिति में दलितों का 40 हजार वोट भाजपा के पक्ष में मतदान करेगा। लेकिन हुआ इसका उलटा। दलितों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि यदि चुनाव में मायावती अनुपस्थित रहती हैं तो फिर वह सहारनपुर के भीम आर्मी प्रमुख और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद के साथ हैं। चंद्रशेखर आजाद ने खतौली विधान सभा उपचुनाव में जयंत चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा को उसी के गढ़ में हराने का काम किया है। तीसरी महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, गुर्जर, दलित और मुसलमान खतौली उपचुनाव की तरह इकट्ठा हो जाता है जैसा कि वहां हुआ भी है तो आगे के लिए भाजपा की राह आसान नहीं है।
भाजपा के एक रणनीतिकार ने बताया कि पार्टी के रणनीतिकारों ने प्रदेश सेक्टर की कमान दो-दो तीन-तीन जनप्रतिनिधियों को सौंपी हुई थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी चुनाव प्रबंधन में शामिल हो गया था। भाजपा ने रालोद-सपा उम्मीदवार मदन भैय्या की गुर्जर बिरादरी की काट में अपनी बिरादरी के दर्जनों गुर्जर नेताओं ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर, सहारनपुर के दो गुर्जर विधायक मुकेश चौधरी, कीरत चौधरी, विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र गुर्जर, लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर, पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर, पूर्व मंत्री सूरज सिंह वर्मा को चुनाव प्रचार में लगाया था। लेकिन वे अपनी गुर्जर बिरादरी पर कोई भी असर नहीं डाल सके। राजपूत वोट इस विधान सभा क्षेत्र में मुश्किल से 8 हजार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव के कारण राजपूतों ने भाजपा का साथ दिया और 40 हजार सैनी बिरादरी ने जरूर भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी का साथ दिया। खतौली विधानसभा सीट पर रालोद के सपा समर्थित उम्मीदवार मदन भैय्या को 97139 वोट मिले जबकि भाजपा की राजकुमारी सैनी 74996 वोट ही ले पाई। ध्यान रहे खतौली विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। 1991 और 1993 में जाट बिरादरी के लोकप्रिय नेता सुधीर बालियान वहां से जीते थे। 1996 में भारतीय किसान कामगार पार्टी के निशान पर राजपाल बालियान चुनाव जीते थे जो वर्तमान में बुढ़ाना सीट से रालोद विधायक हैं।
इस संवाददाता को यह भी जानकारी मिली कि त्यागी, वैश्य और जैन समाज के लोगों ने भी मदन भैय्या को वोट डाला है। अपना गढ़ नहीं बचा पाने से भाजपा के नेता बेहद चिंतित हैं। इसी माह स्थानीय निकायों के चुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे में यदि भाजपा स्थानीय निकायों में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है तो अपनी नीति और नेतृत्व दोनों में बदलाव करना होगा। बहरहाल खतौली ने विपक्ष के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।


