रीना सिन्हा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
रहे अथाह सागर गहरा
या पर्वत की ऊँचाई हो,
पग वीर नहीं पीछे धरते
कसम मिटने की गर खाई हो।
चाहे हो मुट्ठी भर सेना
या फौज हमारी पूरी हो,
दुशमन को धूल चटाने की
सौगंध न कभी अधूरी हो।
हमें संगीनों का शौकघ् नहीं
फूलों सा कोमल मन रखते,
पर गुलशन पर जो आँच आये
तो काटों को खूब कुचलते।
सीमा पर अडिग डटे हुए
हम यह संदेश सुनाते हैं,
रहना निर्भय तू देश मेरे
हम तुझ पर जान लुटाते हैं।
चंदन सी महकेगी माटी
जब तक बल है इन बाँहों में,
अमन चैन की बहे बयार
जब तक हैं सासें इस तन में।
हर बूँद लहू का तेरा है
ये तुझको ही दे जाएँगे,
जिस मिट्टी से जनम लिया
उस माटी के काम आएँगे.
उस माटी के काम आयेंगे
जमशेदपुर झारखण्ड़
रहे अथाह सागर गहरा
या पर्वत की ऊँचाई हो,
पग वीर नहीं पीछे धरते
कसम मिटने की गर खाई हो।
चाहे हो मुट्ठी भर सेना
या फौज हमारी पूरी हो,
दुशमन को धूल चटाने की
सौगंध न कभी अधूरी हो।
हमें संगीनों का शौकघ् नहीं
फूलों सा कोमल मन रखते,
पर गुलशन पर जो आँच आये
तो काटों को खूब कुचलते।
सीमा पर अडिग डटे हुए
हम यह संदेश सुनाते हैं,
रहना निर्भय तू देश मेरे
हम तुझ पर जान लुटाते हैं।
चंदन सी महकेगी माटी
जब तक बल है इन बाँहों में,
अमन चैन की बहे बयार
जब तक हैं सासें इस तन में।
हर बूँद लहू का तेरा है
ये तुझको ही दे जाएँगे,
जिस मिट्टी से जनम लिया
उस माटी के काम आएँगे.
उस माटी के काम आयेंगे
जमशेदपुर झारखण्ड़
