ओबीसी! कितना और सोएंगे?

डॉक्टर वरदानी प्रजापति, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जागो! ओबीसी जागो। अपने अधिकारों के लिए जागो स्थानीय निकायों यथा नगर निगम, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों में अपना आरक्षण बचा सको तो बचा लो, अपने अधिकारों के लिए तो जागो। ओबीसी के नगर निगम और नगर पंचायतों की चुनाव अधियाचना 5 दिसंबर 2022 पर उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ओबीसी के जातियों के अधिकृत आंकड़े ना होने पर ट्रिपल टेस्ट के आधार को लेकर रोक लगा दी है। इस गम्भीर मामले पर हम लोग दो माह पहले से ओबीसी के संगठनों को आगाह कर रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट की तलवार स्थानीय निकाय यथा नगर निगम नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर लटक रही है। 

ओबीसी के नेता चुनाव तो लड़ना चाहते हैं, लेकिन चुनाव की बाधाओं को न सुनना चाहते हैं और ना ही समझना चाहते हैं और न ही  संघर्ष करना चाहते हैं। केवल पके फल  खाना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश  में यह समस्या रातो रात खड़ी हो गई है । यह 1994 में शासनादेश से संबंधित है और सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में 2010 में ओबीसी  के आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट में पास होना जरूरी बताया था। ट्रिपल टेस्ट में ओबीसी की आधिकारिक संख्या की जरूरत होती है और तदनुसार ही आरक्षण राज्य सरकार निर्धारित कर सकती है। एक तरफ सरकार ओबीसी की जनगणना सरकार रोक रही है दूसरी तरफ ओबीसी के आरक्षण हेतु उनकी अधिकृत संख्या भी जरूरी है। इसी आधार पर ओबीसी के स्थानीय निकायों में न्यायालयों  द्वारा रोक भी लगाई जा रही है । इस संबंध में बहुत पहले से जाति जनगणना की मांग की जा रही है लेकिन ओबीसी के ही लोग जाति जनगणना के लिए अपनी आवाज नहीं उठाना चाहते ,जिसका परिणाम आज स्थानीय निकायों में ओबीसी के आरक्षण पर रोक लगाकर सामने है,कल नौकरियों में भी इसी आधार पर रोक लगनी है।यदि ओबीसी अभी भी नही चेता तो पंचायतों में और नगर पंचायतों में ओबीसी के लोगों को समुद्र में डुबकी लगाकर ओबीसी के आदमियों को ढूंढने का काम करना पड़ेगा।                    

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

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