मिथिलेश सेन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
तैनात रहते हैं सीमा पर
अपना सीना ताने।
झुक नहीं सकते हैं
ये देश के दीवाने।
गद्दारी हो नहीं सकती है
देश के हित में।
है कुरबान जान भी
मातृभूमि के पक्ष में।
हर दिन सरहदों पर जो
जान गंवाया करते हैं।
खुद जाग कर वो
हमें सुलाया करते हैं।
शहीद होकर भी वो
अमर हो जाया करते हैं।
ऐसे वीर शहीदों को हम
शीश झुकाया करते हैं।
12वी कला के छात्र दरबार कोठी आगर (मालवा) मध्यप्रदेश
