गौरव सिंघल, देवबंद। सिद्धपीठ श्री मंकेश्वर महादेव मंदिर मानकी पर आयोजित शिवमहापुराण कथा के सप्तम दिन कथा व्यास मनोज महाराज द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमा के साथ शिवपुराण कथा का विश्राम किया गया। कथाव्यास मनोज जी महाराज ने कहा कि शिवपुराण के अनुसार पृथ्वी पर भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। ज्योतिर्लिंग का मतलब है, स्वयं प्रकट हुए प्रकाश-स्तंभ के रूप में शिव। उन्होंने कहा कि शिव 12 जगहों पर शिव लिंग के रूप में साक्षात विराजमान हैं। इनके दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कथा व्यास ने कहा कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात में समुद्र के किनारे स्थित है। चंद्रदेव ने यहां तप करके कुष्ठ रोग से मुक्ति पाई थी। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित है, इसे दक्षिण का कैलाश कहा जाता है। यहां माता पार्वती मल्लिका और शिव अर्जुन रूप में हैं। इनके दर्शन मात्र से पितृदोष दूर होता है। उन्होंने कहा कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। उन्होंने कहा कि एकमात्र स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग यहां काल भी शिव के अधीन है। भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा में नर्मदा नदी में ॐ आकार का द्वीप स्थित है। आदि शंकराचार्य को यहीं ज्ञान प्राप्त हुआ था।
कथा व्यास ने कहा कि केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय के उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग में स्थित है। पांडवों ने यहां शिव की पूजा की थी। 12 ज्योतिर्लिंगों में यह सबसे ऊंचाई पर है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है।भीम नदी का उद्गम यहीं से हुआ है। राक्षस भीम के वध के बाद शिव यहां प्रकट हुए थे। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। वाराणसी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। मान्यता है कि मरने पर शिव स्वयं यहां कान में तारक मंत्र देते हैं। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक में स्थित है।यहां गोदावरी नदी का उद्गम भी है। यहां शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों विराजमान हैं।वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। रावण ने यहां शिव की पूजा की थी। यह बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध। यहां मन्नतें पूरी होती हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका में स्थित है। नागों को दारुक राक्षस के अत्याचार से बचाने के लिए शिव यहां प्रकट हुए। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है। भगवान श्रीराम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग स्थापित किया था। यह सेतु का प्रारंभ बिंदु है। अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित है। भक्त घृष्णा की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव यहां प्रकट हुए। यह एलोरा गुफाओं के पास है।
कथा व्यास ने कहा कि जो रोज सुबह इन 12 नामों का जाप करता है, उसे सात जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और अंत में शिवलोक की प्राप्ति होती है। आज की कथा के मुख्य यजमान संजीव कुमार पूर्व प्रधान दुगाछड़ी एवं शेखर वर्मा सर्राफ रहे। मुख्य आरती के यजमान जोगेन्द्र सिंह एवं अरविंद गर्ग बस वाले रहे। प्रसाद वितरण अमित कुमार नगलीनूर व धीरज गर्ग ठेकेदार द्वारा किया गया। पूर्ण कथा में शीतल जल का वितरण कन्हैया मित्तल, हार्दिक मित्तल द्वारा किया गया। चौधरी परविंदर, चौधरी नरेश,गुड्डू त्यागी, विजय सिंघल, राजेश सिंघल, मुनीश जैन, रितेश बंसल एडवोकेट, संसार सिंह, ओंकार राणा, शिव कुमार, नरेंद्र सिंह, यशपाल सिंह, महक सिंह, देवेंद्र सैनी, विपिन त्यागी, प्रमोद त्यागी सहित काफी संख्या में महिलाएं एवं श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।

